शौचालयों में महिलाओं-युवतियों को सभी तरह की सुविधा निशुल्क देने नगर परिषद करवा रही है खर्च की समीक्षा

शहर में सार्वजनिक शौचालयों में टॉयलेट (लघु शंका) पर महिलाओं-बालिकओं से 5 से 10 रुपए की अवैध वसूली अब नहीं होगी। खबर प्रकाशित होने के बाद नगरपरिषद ने संबंधित फर्म को नोटिस भेज मामले की जांच करवा रही है। वहीं नगरपरिषद अब महिलाओं से टॉयलेट के अलावा स्नानघर और शौच पर लगने वाले शुल्क की भी समीक्षा कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि महीने का खर्च कितना है। परिषद खर्चा बजट में आने पर महिलाओं के लिए सुविधाघर की सुविधा पूरी तरह निशुल्क कर सकती है। नगरपरिषद सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि महिला और बेटियों से टॉयलेट पर किसी तरह का शुल्क नहीं है। यह बेहद गंभीर मामला है। हम मॉडन शौचालयों के संचालन की समीक्षा कर रहे है, जिससे की यह पता चल सके कि महिला और बेटियों को सुविधा घर की सुविधा पूरी तरह निशुल्क दी जा सकती है या नहीं। शहर में 4 ही मॉडन शौचालयों में शुल्क लिया जा रहा है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि यह इसके मेंटेनेंस का खर्चा ज्यादा नहीं होगा। अगर खर्च ज्यादा भी हुआ तो हम डीएलबी को लिखकर यह सेवा महिलाओं के लिए निशुल्क उपलब्ध कराने का आग्रह करेंगे। महिलाओं को सुविधा पूरी तरह निशुल्क मिले, संगठन को गोद लेने तैयार सुविधाघरों में टॉयलेट पर महिलाओं- बालिकाओं से 5 से 10 अवैध वसूली को लेकर महिला सामाजिक संगठनों ने आक्रोश जताया है। संगठनों और समाजसेवी महिलाओं ने मामले में कार्रवाई की मांग की है। वहीं संगठनों ने नगरपरिषद से शहर में महिलाओं के लिए अलग से सुविधाघर बनाने और मौजूदा शौचालयों में महिलाओं से किसी तरह का शुल्क नही ंलेने का आग्रह किया है। कुछ संगठनों ने एक-एक सुविधाघर गोद देने का भी सुझाव दिया है जिससे की उनका संचालन भी ठीक से हो जाए और महिलाओं से फिर किसी तरह की अवैध वसूली नहो।
परिषद के शहर में 21 शौचालयों में 6 सामुदायिक और 6 वातानुकूलित हैं। वातानुकूलित शौचालय प्राइवेट, नए, पुराने बस स्टैंड, कलेक्ट्रेट परिसर, अंबामाता मार्केट और एमजी अस्पताल परिसर में हैं। इनका संचालन सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गेनाइजेशन कर रही है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक 6 शौचालय में शौच और स्नान के लिए 5 रुपए शुल्क ले सकते हैं। अनुमान के मुताबिक आरोजा करीब 500 महिलाएं इन सुविधाघरों का इस्तेमाल करती है। इनमें से ज्यादातर टॉयलेट सुविधा का इस्तेमाल करती है जोकि निशुल्क ही है। जबकि महज 100 से 200 के करीब ही शौच सुविधा का इस्तेमाल करती है। इन पर 10 रुपए तक शुल्क भी होतो महीने के 30 हजार रुपए खर्च आता है जोकि नगरपरिषद वहन करे तो महिलाओं को यह सुविधा पूरी तरह से निशुल्क मिल सकती है।