एमजी अस्पताल का बर्न वार्ड इतना जर्जर कि बारिश में बंद कर दिया, दूसरा बनाया तो मेल-फीमेल का एक ही, उसमें भी एसी बंद

बर्न वार्ड में सीलन से भरी दीवार के पास लेटे मरीज, एसी भी बंद है। भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल में प्रबंधन की लापरवाही के चलते लैब, सीटी स्कैन, एक्सरे और बर्न वार्ड में व्यवस्थाएं बिगड़ चुकी हैं। सबसे ज्यादा बर्न वार्ड की हालत खराब है। यह इतना जर्जर हो चुका है कि बारिश से पहले ही इसे बंद कर दिया। दूसरी जगह जो बर्न वार्ड बनाया उसमें भी दीवारों पर सीलन इतनी है कि एयर कंडीशनर तक नहीं चला पा रहे हैं। यहां मरीजों को संक्रमण का खतरा बढ़ने लगा है।
पंखे की गर्म हवा जलने की जलन को और बढ़ा रही है। मरम्मत नहीं होने से दीवारों से रेती व सीमेंट गिर रही है। नए बर्न वार्ड में सिर्फ 7 बेड ही हैं। इसी तरह से लैब, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी भवन के हाल है। वहीं सीटी स्कैन व सोनोग्राफी में मरीजों को तीन से चार दिन तक वेटिंग दी जा रही है। ऐसे में मरीजों को निजी सेंटरों से रिपोर्ट कराने की मजबूरी बनी हुई है। लैब में मरीजों द्वारा सुबह जांच के लिए सैंपल देने पर दोपहर बाद रिपोर्ट मिल रही है, लेकिन अगर कोई मरीज रिपोर्ट लेने दूसरे दिन आए तो उसे रिपोर्ट ही नहीं देते हैं। सीनियर रेडियोग्राफर संदीप कुमार दोषी का कहना है कि भवन काफी खस्ताहाल है।
फर्श में से सीपेज आता है। बारिश में छतों से पानी टपकता है तो गर्मियों में दीवारों से रेती-सीमेंट। एक भी कमरा ऐसा नहीं है, जो सही हालत में हो। कई बार कहा, लेकिन मरम्मत ही नहीं कराते हैं। रेडियो डाइग्नोसिस विभाग में स्टाफ की बहुत कमी है। अधीक्षक रेडियोग्राफर और रेडियोग्राफर के तीनों पद खाली हैं। एक सीनियर रेडियोग्राफर और तीन सहायक रेडियोग्राफर हैं। रोज औसतन 100 से 120 मरीजों का एक्स-रे करते हैं। सिटी स्केन पीपीपी मोड पर चल रही है। सोनोग्राफी में भी पद खाली पड़े हैं। बर्न वार्ड प्रभारी शंकरलाल यादव का कहना है कि बर्न यूनिट में 7 बेड और 10 बेड के दो वार्ड थे। दोनों खस्ताहाल हैं। मच्छर जाली, शौचालय व खिड़कियों के गेट टूटे हुए हैं। खिड़कियों से कबूतर आते हैं।
स्वयं के वेतन से नलों में टोटियां लगाई, टाइल्स लगाकर स्थिति को सुधारने का प्रयास किया है। पीएमओ को मरम्मत के लिए कई बार बोला, लेकिन नहीं कराते हैं। 10 बेड का वार्ड तो सीलन की वजह से बंद करना पड़ा है। दूसरे वार्ड में भी सीलन है। एसी चालू हालत में है लेकिन चला नहीं सकते हैं।
^रिपेयरिंग शुरू कर दी है। जहां- बड़ी रिपेयरिंग होनी है वहां प्रभारी से एस्टीमेट मंगाया है। बर्न यूनिट का एक वार्ड तो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। रिपेयरिंग हुई तो ठीक नहीं तो दूसरे वार्ड में शिफ्ट करेंगे।
-डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़, पीएमओ, एमजी अस्पताल