सरकारी जमीन नहीं होने का बहाना कर सरपंच ने खुद के घर में बना दिया सार्वजनिक शौचालय

सज्जनगढ़ के भटवाड़ला गांव के सरपंच ने अपने घर में ही पंचायत के मद से 4 लाख रुपए में सार्वजनिक शौचालय बना दिया। दरअसल, सार्वजनिक शौचालय निर्माण की स्वीकृति 2021-22 में दी थी। सरपंच ने पंचायत कोरम में गांव में कहीं भी सरकारी जमीन नहीं होने और ग्रामीणों द्वारा निजी खातेदारी जमीन उपलब्ध नहीं कराने का प्रस्ताव पास कराकर, इसे अपने घर के पिछले हिस्से में करीब सालभर पहले बनवाया है। जबकि गांव में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है।
तत्कालीन पंचायत सचिव मुकेश कुमार कलाल ने निजी जमीन पर सार्वजनिक शौचाालय बनाने का विरोध करते हुए इसके भुगतान रोक लगा दी। सार्वजनिक शौचाालय का निर्माण ऐसी जगह करना था, जहां आसपास करीब 10 घर हो, सरकारी जमीन हो लेकिन सरपंच ने सार्वजनिक शौचाालय अपने घर के पिछले हिस्से में पिताजी के नाम की खातेदारी जमीन पर निर्माण करा दिया। यहां सरपंच के घर को छोड़कर आसपास कोई भी घर नहीं है। सार्वजनिक शौचाालय सिर्फ कागजों में है, जबकि इसका उपयोग सिर्फ और सिर्फ सरपंच और उसका परिवार कर रहा है। शौचालय की सुविधा को लेकर परेशान ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला परिषद सीईओ से की है।
जिला परिषद सीईओ को दिए शिकायत पत्र में गांव के श्मशान घाट के पास रपट पुलिया निर्माण, पानी वाली टंकी के पास ग्रेवल सड़क, श्मशान घाट से घाटी की ओर ग्रेवल सड़क निर्माण में भी वित्तीय गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया है। सरपंच और सरपंच पति ने इसका निर्माण किए बिना ही इसका भुगतान उठाया है। सचिव ने इस मामले की जानकारी लेने के बाद ही बताने की कहा। सरपंच कांतादेवी कटारा के पति शांतिलाल कटारा का कहना है कि सार्वजनिक शौचाालय के निर्माण के लिए गांव में सरकारी जमीन नहीं मिली थी। गांव के लोगों ने अपनी खातेदारी जमीन उपलब्ध नहीं कराई तो उन्होंने अपने घर के पीछे सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करा दिया। गांव के लोगों के उपयोग करने के लिए सार्वजनिक शौचाालय में सड़क किनारे की तरफ सीढ़ियां दी हैं।
^मुझे इस केस की ज्यादा जानकारी तो नहीं है, क्योंकि डेढ़ माह पहले ही यहां का चार्ज संभाला है। जहां तक मुझे पता है, सार्वजनिक शौचालय सरपंच की निजी जमीन पर बनाया है। जबकि सरकारी जमीन पर ही बनना है। इस कारण पंचायत ने उसका भुगतान रोक दिया है।
-कमल सोनी, सचिव, सज्जनगढ़
ग्राम पंचायत सार्वजनिक शौचालय की जिओ टैगिंग में सिर्फ सरपंच का घर ही दिख रहा है, आसपास ग्रामीणों के घर ही नहीं हैं।