सिस्टम की नाकामी के गड्ढे, डूंगरपुर रोड से ओजरिया मंडी तक सड़क जर्जर

बांसवाड़ा शहर की डूंगरपुर रोड से ओजरिया सब्जी मंडी तक की सड़क मानो खुद सवाल पूछ रही है आखिर मेरा कसूर क्या है? हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मंदिर और स्कूल के सामने से पैदल गुजरना भी खतरे से खाली नहीं। यह मार्ग सिर्फ एक सड़क नहीं, हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा एकमात्र रास्ता है।
कॉलोनियों में रहने वाले बच्चों को स्कूल जाना हो, युवाओं को नौकरी पर पहुंचना हो या फिर बीमार मरीजों को अस्पत ाल—हर किसी को इसी खस्ताहाल रास्ते से गुजरना पड़ता है। ऊपर से भारी वाहनों की 24 घंटे आवाजाही ने सड़क को ‘जख्मी’ कर दिया है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और दलदल जैसे हालात बन चुके हैं, खासकर बारिश में यह रास्ता जानलेवा बन जाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सड़क के लिए करीब एक साल पहले टेंडर हो चुका है, लेकिन आज तक काम की शुरुआत नहीं हुई। न ठेकेदार पर कोई कार्रवाई हुई, न जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, प्रदर्शन की चेतावनी दी, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों ने आंखें मूंद लीं।
लोधा बाईपास से लेकर ओजरिया, सब्जी मंडी, गारिया होते हुए मकोड़िया पुल तक की यह सड़क अब दुर्घटनाओं का अड्डा बन चुकी है। आए दिन सब्जी-भरे वाहन कीचड़ में फंसते हैं, जिससे जाम लग जाता है। यह सड़क अब सुविधा नहीं, मुसीबत बन गई है।
ओजरिया क्षेत्र के लोग साफ कह चुके हैं कि अब और इंतजार नहीं करेंगे। अगर जल्द काम शुरू नहीं हुआ, तो सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे। करोड़ों के बजट और टेंडर का फायदा अगर जनता को नहीं मिल रहा, तो फिर ये योजनाएं किसके लिए हैं? अब समय आ गया है कि शासन-प ्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि नींद से जागें, वरना सड़क के गड्ढों में सिर्फ गाड़ियां ही नहीं, भरोसा भी डूबता जा रहा है। ओजरिया बाईपास पर खस्ताहाल सड़क।