छतें टपकने से मरीजों को बेड खिसकाने पड़ रहे, मरम्मत के नाम पर पीडब्ल्यूडी चौकी केवल लीपापोती कर रही

बारिश शुरू होते ही एमजी अस्पताल की छतें फिर से टपकने लगी हैं। अस्पताल में सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से चौकी स्थापित होने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। 29 जुलाई को दैनिक भास्कर ने अस्पताल प्रबंधन और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को अस्पताल में 8 से 10 जर्जर, सीलन और पानी टपकने के स्पॉट मौके पर ले जाकर दिखाए थे, लेकिन 26 दिन बाद भी समस्या का हल नहीं हो सका है। अस्पताल कर्मचारियों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी चौकी में शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है।
हॉस्टल की जर्जर दीवार और सीलन को लेकर कई वार्डन ने कई बार शिकायत दी, लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। बारिश के चलते कोई हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इधर, अस्पताल प्रबंधन ने पीडब्ल्यूडी एसई को चौकी की ओर से काम में लापरवाही की शिकायत की है।
सही कराने की जगह गेट ही बंद कर दिया: हड्डी वार्ड के प्लास्टर रूम की ओर से एंट्री गेट का पोर्च पूरी तरह से जर्जर है। इसमें जगह-जगह से पानी टपक रहा है। इसके नीचे से रोज सैकड़ों मरीज, इनके परिजन और स्टाफकर्मी निकलते हैं। मरम्मत करने की जगह गेट को ही बंद कर दिया। हड्डी वार्ड में जहां से छत टपक रही थी, उस जगह को छोड़कर बगल में छत पर प्लास्टर कर िदया। इसके अलावा बिल बनाने के लिए 4 जगह और प्लास्टर कर दिया। हैरानी की बात है कि जहां प्लास्टर किया, वहां से भी पानी टपकना वापस शुरू हो गया है। हड्डी वार्ड, शौचालय और ओपीडी रूम के अंदर और बाहर की गैलेरी में प्लास्टर से सरिए तो ढक दिए, लेकिन पेंट हुई दीवारों को बदरंग कर दिया। ऐसे में अब इन दीवारों पर फिर से पेंट किया जाएगा। एमसीएच विंग के पीडियाट्रिक विभाग में भी सीलन और पानी टपकने की समस्या अभी तक दूर नहीं हो पाई है।
^मरम्मत के लिए अस्पताल 55 से 60 लाख की राशि का एडवांस में पीडब्ल्यूडी चौकी को भुगतान कर चुका है। कई जगह ठेकेदार ने काम करने की जगह और बिगाड़ दिया है। मेंटिनेंस के नाम पर भी लापरवाही की शिकायतें मिल रही हैं। इसके लिए पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता को शिकायत कर दी है।
-डॉ. दिनेश माहेश्वरी, पीएमओ, एमजी