4डी सोनोग्राफी मशीन से पता चलेगी बच्चे की जन्मजात विकलांगता
बांसवाड़ा में हर 3 दिन में एक बच्चा इससे पीड़ित, उदयपुर में ही मिलेगा इलाज
बच्चों की जन्मजात विकृति को दूर करने के लिए अब 4डी सोनोग्राफी मशीन की सुविधाएं अस्पतालों में मिलेंगी। हालांकि अभी यह सुविधा संभाग के मेडिकल कॉलेजों में ही उपलब्ध रहेगी। लेकिन इससे राहत यह मिलेगी कि बच्चे की शारीरिक अंगों की विकृति के बारे में गर्भ में ही पता किया जा सकेगा। यह सुविधा हमारे जनजाति क्षेत्र में इसलिए जरूरी और फायदेमंद है, क्योंकि यहां भी जन्मजात विकलांगता वाले हर माह 5 से 8 फीसदी बच्चे जन्म लेते हैं। यह विकलांगता इसलिए भी आती है क्योंकि गर्भ में भ्रूण को विकसित होने में पोषक तत्वों की प्राप्त नहीं होती। ये नई मशीन स्पष्ट पता कर सकेगी कि बच्चा स्वस्थ है या उसमें विकलांगता है। इससे गर्भस्थ शिशु की तस्वीर 2डी और 3डी सोनोग्राफी से बिल्कुल साफ नजर आएगी। इससे रीड की हड्डी में मांस बाहर निकालने, पांवों का टेडापन, सिर का ज्यादा बढ़ा होना, गर्दन और पांव में गांठ, होंट कटे होने सहित विभिन्न विकृतियों का पता चल सकेगा। इससे फायदा यह होगा कि कानूनन इस तरह के बच्चों के जन्म से पहले ही गर्भपात कराया जा सकता है। हालांकि इसके लिए पूरी प्रक्रिया नियमानुसार ही अपनानी होगी।
यह मशीन बहुत ही फायदेमंद होगी, क्योंकि आसानी से बच्चे की स्थिति के बारे में पता किया जा सकेगा। बांसवाड़ा में एमजी अस्पताल में भर्ती होने वाले नवजातों की बात करें तो हर माह 10 से 12 बच्चे ऐसे आते ही हैं, जिनमें किसी अंग की विकृति मिल जाती है। कई विकृतियां तो ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ आजीवन सहनी पड़ती है। पहले से पता लगने के लिए कारण गर्भ में भी इलाज और उपचार किया जा सकेगा। डाॅ. प्रद्युम्न जैन, शिशु रोग विशेषज्ञ, एमजीएच, बांसवाड़ा।