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को​षाधिकारी अरविंद के बाद पारगी की भूमिका भी संदिग्ध, गौड़ खुद भी आ सकते हैं जांच के दायरे में

Banswara
को​षाधिकारी अरविंद के बाद पारगी की भूमिका भी संदिग्ध, गौड़ खुद भी आ सकते हैं जांच के दायरे में
@HelloBanswara - Banswara -

जिला कोष कार्यालय के स्ट्रॉन्ग रूम से 5.23 करोड़ मूल्य के स्टांप व टिकट गबन मामले में तत्कालीन कोषाधिकारी अरविंद शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस जांच का दायरा और बढ़ सकता है। क्योंकि, जांच में सामने आया है कि आरोपी कैशियर नारायणलाल यादव ने अरविंद के टीओ रहते 3.60 करोड़ मूल्य के स्टांप चुराए थे। जबकि स्ट्रॉन्ग रूम से कुल 5.23 करोड़ कीमत के स्टांप व टिकट का गबन हुआ है।

गिरफ्तार अरविंद नवंबर 2020 से अक्टूबर 2023 तक कोषाधिकारी रहा। जबकि आरोपी कैशियर इससे पहले ही साल 2018 में कोष कार्यालय में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर लगा था। ऐसे में बाकी के 1.63 करोड़ कीमत के स्टांप इसी अवधी में चुराने की आशंका है। ऐसे में पुलिस अपनी जांच का दायरा 6 साल पीछे तक ले जा सकती है। फिलहाल गिरफ्तार तत्कालीन कोषाधिकारी अरविंद शर्मा को पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से 2 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया।

कोषाधिकारी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच में साल 2018 से अब तक कोषाधिकारी या अतिरिक्त कोषाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। आरोपी अरविंद शर्मा साल 2020 से 2023 तक टीओ रहा, जबकि इससे पहले मौजूदा टीओ हितेष गौड़ के पास महज कुछ महीनों के लिए अतिरिक्त टीओ का जिम्मा रहा था। हालांकि हितेष गौड़ ने ही पिछले दिनों टीओ पदभार संभालने पर विभागीय ऑडिट करवाई और इसके बाद करोड़ों के इस गबन का सच सामने आया।

वहीं उनसे पहले भरत पारगी टीओ रहे हैं। पूछताछ में आरोपी कैशियर और वेंडर ने कबूला है कि टीओ अरविंद ने उनसे कैश और भेंट प्राप्त की है। इससे पहले भी गिरफ्तार कैशियर नारायणलाल के पास से मिली गाड़ी वेंडर आशीष जैन के नाम से थी। वहीं स्टांप गबन से प्राप्त रुपयों से जमीन खरीदने की बात भी सामने आ चुकी है। ऐसे में पहले भी आरोपियों में एक-दूसरे में लेनदेन करना सामने आया है। पुलिस फिलहाल अलग-अलग रिकॉर्ड खंगाल कर किसकी क्या भूमिका रही, यह पता लगा रही है। वहीं कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी कर रही है। कोष कार्यालय की जांच में स्ट्रॉन्ग रूम से 10,56,417 स्टांप व टिकट चुराने का खुलासा हुआ। जिनकी कीमत 5.23 करोड़ रुपए आंकी गई है।

मामला पुलिस तक पहुंचा। जिस पर कैशियर नारायणलाल यादव, वेंडर आशीष जैन और सहयोगी भरत कुमार राव को गिरफ्तार किया गया। जांच बढ़ी तो तत्कालीन टीओ अरविंद शर्मा को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकरण में अब तक 4 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। वहीं आरोपी वेंडर से नकली टिकट छापने में इस्तेमाल प्रिंटर, नोट गिनने की मशीन और 500 जाली टिकट बरामद किए हैं।

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