लगभग एक हजार साल पुराने अरथूना के मंदिर पहली बार रात में होंगे रोशन
लगभग एक हजार साल पुराने अरथूना के मंदिर पहली बार रात में होंगे रोशन
कोणार्क फेस्टिवल की तर्ज पर होंगी लोक-शास्त्रीय प्रस्तुतियां
Banswara January 03, 2018 अरथूना-माही महोत्सव के तहत पहली बार 7 जनवरी को रात्रि में लगभग एक हजार साल पुराने अरथूना के मंदिर पहली बार रात्रि में रोशन होंगे। इन मंदिरों पर आकर्षक रंगीन रोशनी की जाएगी और इनको बेकग्राउण्ड में रखते हुए कोणार्क फेस्टिवल की तर्ज पर लोक-शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
जिला कलक्टर भगवतीप्रसाद ने बताया कि महोत्सव के तहत आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला का आगाज अरथूना देवालय वृन्द बाह्य परिसर में देशभर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ होगा।
कार्यक्रम संयोजिका एवं अभिनव शिक्षा समिति की सचिव सुश्री मालिनी काले ने बताया कि सायं 5.30 बजे से प्रारंभ होने वाले कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के पश्चात प्रियांशी व्यास, तनिषा जोशी, सौम्या जैन, सोनाली लढ्ढा एवं सिया जैन के दल द्वारा उप शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी वहीं श्रीमती मनिषा भट्ट व मनु काले द्वारा सितार वादन, राग रागेश्री व तबला वादन प्रस्तुत किया जाएगा।
सुश्री काले ने बताया कि इसके पश्चात बड़ौदा (गुजरात) की सुश्री वासंती जोशी, प्राजक्ता जोशी व सुश्री कांग्शा आचार्य द्वारा भरतनाट्यम नृत्य तथा शिव स्तुति व तिल्लाना की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा श्रीमती रत्ना घाटे, श्रीमती मेघा, श्रीमती वनिता कंसारा एवं चि़त्रा काले द्वारा राजस्थानी मांड गायन होगा। इस दौरान जयपुर के कलाकारों द्वारा संतुर वादन की प्रस्तुति भी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में सुश्री हेतल आर्या, रक्षिता जैन, नेहा जाधव, साइली श्रीनिवास व पशमिना व्यास द्वारा कत्थक नृत्य, शिव वंदना, भवानी वंदना एवं पदन्यास की प्रस्तुति दी जाएगी तथा भारत के मुंबई, दिल्ली, मेरानगढ़ में प्रस्तुति दे चुके वागड़ के लोक कलाकार खेमराज एवं दल द्वारा वागड़ के फागुनी गैर नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा।