बेरोजगारी की मार; खाद्य आपूर्ति विभाग में लगे 70 कम्प्यूटर ऑपरेटर्स काे निकाला, क्याेंकि : बजट नहीं

पहले ही बेरोजगारी झेल रहे युवाओं पर अब नौकरी से निकालने से दोहरी मार पड़ रही है। खाद्य आपूर्ति और निगम में लगे प्रदेशभर में करीब 70 कंप्यूटर ऑपरेटर्स काे निकाला जा रहा है। जिला ऑफिस में लगे कर्मचारियों को आदेश भी दे दिया है। दरअसल हर जिले में खाद्य आपूर्ति और निगम के ऑफिस में दो से तीन कंप्यूटर ऑपरेटर्स लगे हुए हैं। जिनको टीपीडीएस मद में मिलने वाले बजट से तनख्वाह मिलती थी। अब वित्त विभाग के प्रबंधक ने आदेश जारी कर टीपीडीएस मद बजट पर रोक लगा दी है। सभी जिलों के नागरिक आपूर्ति प्रबंधक को पत्र लिखा है कि प्रबंधक आवंटन हुए बजट की शेष राशि की जल्द जानकारी मुख्यालय में भेजी जाए, साथ ही भेजे गए मद की राशि का व्यय नहीं किया जाए। इसके अलावा अब टीपीडीएस मद बजट उपलब्ध नहीं होगा। इस मद से ही इन कंप्यूटर ऑपरेटर्स को ही सैलरी मिलती रही है। खास बात यह है कि विभाग की ओर से इन कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के लिए पहले से कोई जानकारी तक नहीं दी गई।
कर्मचारी बोले-कोरोनाकाल में रातभर काम किया, अब हमें निकालने से पहले नोटिस तक नहीं दिया
कई जिलों में लगे कंप्यूटर ऑपरेटर्स को अभी तक विभाग ने नहीं बताया है कि उन्हें नाैकरी से निकाल रहे हैं। महाप्रबंधक की ओर से 3 जनवरी 2022 को ऑर्डर निकालकर टीपीडीएस मद बजट को बंद करने का आदेश दे दिया। 7 साल से भी ज्यादा समय से ये कर्मचारी जिलों के कार्यालयों में काम कर रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि एक झटके में नौकरी से निकालने का कह दिया। उससे पहले कभी भी कोई नोटिस देकर जानकारी तक नहीं दी। जिला रसद विभाग में लगे कंप्यूटर आपरेटर अक्षय ने बताया कि उन लोगों ने कोरोना की जब पहली लहर थी उस समय भी हमने रात भर काम किया। एक दिन भी छुट्टी तक नहीं ली। अक्षय ने बताया कि वह 7 साल से ज्यादा समय से काम कर रहा था, नौकरी से निकालने से पहले तक कोई सूचना भी नहीं दी।
नॉर्मलाइजेशन में गड़बड़ी पर बोर्ड के खिलाफ कोर्ट में याचिका दर्ज
पटवारी भर्ती परीक्षा 2021 के रिजल्ट को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है। परीक्षा में धांधली और भारी अनियमितताओं के खिलाफ हाईकोर्ट में लगी याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होगी। पटवारी कैंडिडेट ओम प्रकाश की ओर से एडवोकेट रामप्रताप सैनी ने सिविल रीट याचिका लगाई है, जिसमें राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के चेयरमैन और सचिव के खिलाफ केस लगाया है। याचिका में गुहार लगाई कि जब तक हाईकोर्ट मामले पर सुनवाई कर फैसला नहीं सुना दे, तब तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। पटवार भर्ती में परिणाम नॉर्मलाइजेशन पद्धति से जारी किया है। जिसमें पारी 4 के कैंडिडेट्स के नंबर कम करने और इसी पारी के सबसे कम कैंडिडेट्स का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में चयन को लेकर सवाल खड़े हुए थे और भास्कर ने सबसे पहले खुलासा किया था। रिजल्ट में पारदर्शिता ही नहीं रही। कैटेगरी वाइज रिजल्ट भी जारी नहीं किया है। कैटेगरी वाइज पोस्ट भी नहीं बताई हैं। याचिका में एक बिंदु यह भी है कि परीक्षा में पूछे गए सवालों में सही उत्तर भरने के बाद भी बोर्ड ने उसे गलत करार दिया। याचिका में पटवारी परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर सही करवाकर दोबारा आंसर-की और नए सिरे से रिजल्ट जारी कराने, याचिकाकर्ता को बोनस नंबर देने की मांग की है। एडवोकेट रामप्रताप सैनी ने बताया कि रिट में कहा है कि कैंडिडेट ने 24 अक्टूबर 2021 को पटवारी परीक्षा दी थी। परीक्षा में उसने 3 प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे, लेकिन बोर्ड ने गलत माना है। साथ ही फाइनल आंसर-की भी गलत जारी की है।
मुख्यालय से पत्र मिला है, इसलिए हटाया : प्रबंधक मुख्यालय से पत्र प्राप्त हुआ था। जिसमें टीपीडीएस मद बंद कर दिया है। इस मद से ही कंप्यूटर आपरेटर का भुगतान होता था, लेकिन बजट बंद कर दिया है तो हमें तो इन कर्मचारियों को निकालना पड़ा है। -नरेश मीणा, प्रबंधक, जिला नागरिक आपूर्ति एवं निगम
अभी हम उनके लिए अलग से बजट का मंथन कर रहे हैं हमने यह बजट बंद किया है। कंप्यूटर आपरेटर को निकालेंगे नहीं। उनके लिए अलग से बजट को लेकर मंथन कर रहे हैं। ताकि इन ऑपरेटर्स का भुगतान किया जा सके। -वीपी सिंह, एमडी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग
28 जनवरी काे प्रकाशित
पटवार भर्ती परीक्षा 2021, सही उत्तर को गलत बताया
नंबर और मेरिट अब तक जारी नहीं की
{पटवारी भर्ती का रिजल्ट जारी किया। { फाइनल आंसर-की जारी करने से पहले एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट अपलोड नहीं की। { प्रश्न पत्र में कई प्रश्न सिलेबस के बाहर से पूछे गए। { प्रश्न पत्र तैयार करने में भी अनियमितता बरती गई है। { रिजल्ट में कैंडिडेट्स के नंबर और मेरिट के बिना यह जानना ही सम्भव नहीं है कि कौनसा कैंडिडेट मेरिट में ऊपर रहा, कौन नीचे रहा है।