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कलेक्टर को पता ही नहीं, अनुमति लिए बिना ही 4 गुना ज्यादा दर पर किए टेंडर

Banswara
कलेक्टर को पता ही नहीं, अनुमति लिए बिना ही 4 गुना ज्यादा दर पर किए टेंडर
@HelloBanswara - Banswara -

माही बांध के गेटों की मेंटेनेंस ठेके में गड़बड़ी की आशंका

बांसवाड़ा| माही परियोजना के अफसरों ने कोविड 19 महामारी की आपदा को अवसर में बदल दिया। राज्य सरकार की रेड अलर्ट लॉकडाउन गाइड लाइन की अवहेलना करते बिना कलेक्टर की अनुमति के गुपचुप रूप से अपने कार्यालय खोल लिए।

चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से पिछले साल की तुलना में चार गुना ऊंची दरों पर टेंडर आमंत्रित कर लिए। जबकि गत वर्ष इन कामों के जो टेंडर हुए थे, इस बार जो टेंडर आमंत्रित किए हैं, दोनों ही वर्ष 2020 की बीएसआर दरों पर आधारित हैं। वहीं इन कार्यों को करने में सक्षम कुछ ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए दो तीन कामों को एक साथ मिला लिया। इस तरह यह टेंडर बीस लाख रुपए से ऊपर के हो गए। जिससे 15 लाख रुपए तक के कार्यों को करने में सक्षम डी क्लास कॉन्ट्रेक्टर तो स्वतः ही इस प्रक्रिया से बाहर हो गए। दरअसल माही परियोजना के एक्सईन डेम डिवीज़न (अधिशासी अभियंता, बांध खंड) की ओर से पिछले दिनों निविदा संख्या 3 वर्ष 2021-22 जारी की गई। जिसमें माही बांध के सभी 16 गेटों की आगामी वर्षाकाल के छह माहों के लिए रखरखाव व संचालन कार्य के लिए 20.35 लाख की लागत तय की गई। जबकि गत वर्ष इस कार्य के लिए इसी कार्यालय ने 5.58 लाख रुपए की लागत तय की थी। जबकि पिछले साल इसमें 40 टन वजन की क्रेन की मरम्मत भी शामिल थी। जिस काम के लिए मौके पर हर समय जेएन-एईएन, वहां अतिरिक्त कार्मिक के रूप में गेज रीडर की भी मांग कीइस निविदा को बढ़ा-चढ़ा कर बताते हुए लागत बढ़ाने का भी प्रयास किया। निविदा में बांध के जलस्तर काे नापने के लिए गेज रीडर की आवश्यकता बताई है। विभाग के ही अन्य विशेषज्ञ इंजीनियरों के अनुसार गेज रीडर के नाम पर फालतू खर्च बताया है। बांध पर हर समय 24 घंटे, 8-8 घंटे की शिफ्ट में एक जेईएन व एक एईएन मौजूद रहते हैं। उनके साथ हेल्पर व अन्य कार्मिक भी होते हैं। यह आसानी से पानी के जलस्तर का मीटर देख सकते हैं।


 आवश्यक काम होने से ऑफिस खोले हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार दो तीन कामों को मिला कर एक टेंडर किया है। इसलिए राशि ज्यादा लग रही है, जबकि पिछली बार यही काम करीब 21 लाख रुपए में हुआ था। यदि इन कामों के लिए एक ही ठेकेदार क्वालीफाई हुआ तो हम उसे काम नहीं देंगे। -हेमंत पनेडिया, एक्सईएन, डेम डिवीजन, माही परियोजना, बांसवाड़ा।


 जल संसाधन या माही के किसी अधिकारी ने विभागीय कार्य के लिए कार्यालय खोले जाने की अनुमति नहीं ली है। लॉकडाउन गाइड लाइन के अनुसार इन विभागों के कार्यालय खोले जाने की अनुमति नहीं है। आवश्यक परिस्थितियों में कलेक्टर की अनुमति से खोले जाने का प्रावधान है। अंकित कुमार सिंह, कलेक्टर


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