अस्पताल में डॉक्टर व फार्मासिस्ट लगाए ही नहीं, ₹1 करोड़ से ज्यादा का भुगतान उठाया

पांचवड़ा पीएचसी में 5 साल से बन रहा था दोनों कार्मिकों का वेतन
बांसवाड़ा जिले में परतापुर ब्लॉक में संचालित पांचवड़ा पीएचसी में वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां संचालक फर्म को नियम विरुद्ध गलत भुगतान किया गया। फर्म को हर माह औसतन 2.10 से 2.25 लाख के करीब किया जाता है, जो कि पिछले 5 सालों से अस्पताल का संचालन कर रही है। सालाना करीब करीब 27 लाख की राशि फर्म सरकार से उठा रही है। ऐसे में औसत भुगतान का योग 1.37 करोड़ के करीब बैठता है।
प्रारंभिक तौर पर वित्तीय गड़बड़ी सामने आने पर डॉ. एचएल ताबियार ने बीसीएमओ परतापुर और संचालन करने वाली फर्म चित्रांश एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी जयपुर को नोटिस दिया है। प्रकरण में नीसीएमओ सवालों के घेरे में है। क्योंकि पूर्व में भी ग्रामीणों ने विभाग और प्रशासन को शिकायतें की थी। वहीं किसी अस्पताल में इतने लंबे समय से डॉक्टर या स्टाफ नहीं है तो ब्लॉक ऑफिस से क्या कार्यवाही की गई। भुगतान क्यों किया गया?
पीएचसी में ये कार्मिक होने चाहिए एमओयू अनुसार पीएचसी में 15 कार्मिक होने चाहिएं, जिसमें चार एएनएम इस अस्पताल से जुड़े सब सेंटरों पर नियुक्त होने चाहिए और 11 कार्मिक जिसमें एक मेडिकल ऑफिसर, कम्प्यूटर ऑपरेटर, एक लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट, दो मेल नर्स सेकंड ग्रेड, महिला स्वास्थ्य दर्शिका (एलएचबी ), एक एएनएम, 2 वार्ड बॉय एक सफाई कर्मी। यदि अस्पताल में कोई कर्मचारी अनुपस्थित रहता है तो 500 रुपए तथा चिकित्सक के अनुपस्थित रहने पर 1500 रुपए संचालन खर्च से काटने के प्रावधान हैं।
विभागीय जांच : अन्य कार्मिक भी अनुपस्थित
* अस्पताल में 2 जीएनएम, 1 एलएचल्री, 2 स्त्रीपर मौजूद थे। अस्पताल में बताया गया कि पिछले करीब 2 सालों से डॉक्टर और फार्मासिस्ट तो काम कर ही नहीं रहे हैं। वहीं पिछले कुछ दिनों से लैब टेक्नीशियन और कंप्यूटर ऑपरेटर तक नहीं आ रहे हैं।
० डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने पर भी हर माह भुगतान उठाया गया। जो वित्तीय गड़बड़ी में आता है। फर्म को नॉर्म्स अनुसार कार्मिकों को अस्पताल में लगाना था, लेकिन उसकी पालना भी नहीं की गई है।
पहले दो अस्पतालों से निकली है 70 लाख की रिककी पहले दो अन्य अस्पताल भी पीपीपी मोड पर थे। वहां गड़बड़ी सामने आई थी। इसमें विभागीय ऑडिट में करीब 70 लाख रुपए की फर्म से बसूली करनी है। इसके बाद से विभाग लगाता बसूलीके प्रयास कर रहा है, लेकिन संबंधित फर्म ने अब तक्र रुपए जमा नहीं कराए हैं। इसके बाद से ही पीपीपी मोड पर संचालित अन्य अस्पतालों की निगरानी बढ़ाई गई।
# जांच में खामियां मिली हैं। तथ्यात्यक रिपोर्ट के लिए संचालन करने वाली संस्था और बीसीएमओ को नोटिस जारी कर दिया है। दोनों में से किसी का जवान प्राप्त नहीं हुआ है। भुगतान गलत किया गया है तो इसमें बीसीएमओ की भी जिम्मेदारी है। अगर जवाब नहीं आता है तो आगे कार्रवाई करेंगे। -डॉ. एचएल ताबियार, सीएमएचओ, बांसवाड़ा