एमजी अस्पताल बीमार है... छतें टपक रही, दीवारों पर फंगस व भीगी बैड शीट, नवजातों- झुलसे मरीजों को संक्रमण का खतरा

दीवार से गिरता प्लास्टर और भीगे फर्श। टपकती छतों से मरीज को भीगने से बचाने पलंग इधर-उधर करते मरीज के परिजन। जिले के सबसे बड़े एमजी अस्पताल के वार्डों में कुछ ऐसी ही बदइंतजामियों से मरीज और उनके परिजनों को दोचार होना पड़ रहा है। बारिश के बीच भास्कर रिपोर्टर ने अस्पताल के वार्डों का जायजा लिया तो अव्यवस्थाएं बदतर नजर आई।
यहां मेलवार्ड के पूरे कक्ष में पानी टपक रहा है और दीवारों पर सीलन आ चुकी है। छत का प्लास्टर टूटने से लोहे के सरिए तक नजर आने लगे हैं। हालत यह है कि टपकती छत से भर्ती मरीज को बचाने परिजन पलंग इधर-उधर करते दिखे। यहां कुछ पलंगों की बैड शीट भीगी नजर आई, जिससे मरीज में संक्रमण का खतरा बढ़ चुका है। यह स्थिति तब है जब प्रमुख शासन सचिव स्तर के अधिकारी तक निरीक्षण कर चुके है। एमजी अस्पताल में 400 से ज्यादा बैड है। ऐसे में इन मरीजों के साथ परिजनों के आने से रोजाना यहां 1 हजार से भी ज्यादा लोग रहते है। ऐसे में वार्डों में पानी के चलते कई मरीजों के साथ परिजनों को खारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। एमसीएच विंग में नवजातों और प्रसूताओं पर इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया है। यहां 12 करोड़ की लागत से 2016 में इस बिल्डिंग का निर्माण कराया गया था। लेकिन महज 3 साल में ही दीवारों में दरारें, सीलन और पानी के टपकने की शिकायतें आने लगी थी। इसके बाद इसकी लाखों रुपए खर्च कर मरम्मत कराई गई लेकिन नतो दीवारों से सीलन गायब हुई और न ही फंगस। बिल्डिंग के भीतर दुर्धंग आने से दम घुटने की नौबत आन पड़ रही है। ऐसे में भर्ती प्रसूताओं और नवजातों पर संक्रमण का खतरा है। छतें टपकती हैं और बिस्तर गिले हों तो कमरे के वातावरण में नमी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दीवारों में सीलन से बदबू आने लगती है। शिशु, गायनिक, पोस्ट ऑपरेटिव, आईसीयू, बर्न वार्ड और इमरजेंसी वार्डों में छतें लीकेज प्रूफ होना जरूरी है।
इससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। - डॉ.दिनेश द्विवेदी, ईडी, राजस्थान मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन, जयपुर एमजी अस्पताल के पीएमओ डॉ.खुशपाल सिंह राठौर ने कहना है कि समय-समय पर एमजी अस्पताल के विभिन्न वार्डों के भवनों के रखरखाव के लिए एनएचएम के एक्सईएन सिविल विंग को लिखा जा चुका है। रखरखाव का बजट आने पर एमजी अस्पताल के विभिन्न वार्डों के भवनों का समुचित रखरखाव करवाया जाएगा। वहीं अभी डीएमएफटी के तहत एमजी अस्पताल के सभी टॉयलेट्स को नए सिरे से निर्मित करने डेढ़ करोड़ का बजट पीडब्ल्यूडी को दिया है। एमजी अस्पताल के मेल वार्ड और शिशु वार्ड के गलियारे की फर्श बारिश के पानी से पूरी तरह भीगी हुई है।
वहीं जनरल पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड के दरवाजे पर भी पानी गिरता नजर आया। मेल वार्ड में तो प्लास्टर गिरने से आरसीसी के सरिए तक बाहर निकल आए हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि वार्डो में सीलन से काफी दिक्कतें हो रही है। बदबू इस कदर है कि मुंह पर कपड़ा लगाना पड़ रहा है। यहां आकर और बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।