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Mahi Bajaj Sagar Dam

माहि बजाज सागर डेम राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बांध है, जो की माही नदी पर बना हुवा हुआ है, इसका नाम श्री जामनाला बजाज के नाम पर रखा गया है। जो की बांसवाडा से 16 किलोमीटर दुरी पर स्थित है। 

माही नदी मध्य प्रदेश से शुरू होती है, और राजस्थान के वगड़ क्षेत्र में बहने के बाद, गुजरात में प्रवेश करती है और अरब सागर में मिलती है।

जलविद्युतीय बिजली उत्पादन और जल आपूर्ति के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए 1972 और 1983 के बीच बांध का निर्माण किया गया था। इसमें कई मगरमच्छ और कछुए हैं। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में कई द्वीप है, इसलिए बंसवाड़ा को “लोकप्रिय शहर” कहा जाता है। बांध पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। बांध में 140 मेगावॉट की क्षमता है। खंभात की खाड़ी में बह रही माही नदी प्रदूषण और लवण के कारण विलुप्त होने की कगार पर है।

माही परियोजना 

इस परियोजना का शिलान्यास 1960 में किया गया था, परंतु परियोजना का प्रारभिक निर्माण कार्ययोजना आयोग द्वारा नवबर, 1971 में 31.36 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त होने पर प्रारम्भ किया। इसका निर्माण तीन इकाइयों में किया गया। प्रथम इकाई के अन्तर्गत 435 मीटर लंबे एवं अधिकतम 74.5 मीटर ऊंचे चुनाई एवं कंकरीट बांध का निर्माण किया गया है। दाएं तथा बाएं किनारों पर 2,674 मीटर लंबे मिट्टी के बांध का निर्माण किया गया है, जिसकी अधिकतम ऊंचाई 43 मीटर है। यह परियोजना माननीय प्रधान मंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा राष्ट्र को 1.11.1983 में समर्पित किया गया।

द्वितीय इकाई में नहरों एवं वितरण प्रणाली के तहत मुख्य बांध की परिधि पर स्थित विद्युतगृह-प्रथम के द्वारा सिंचाई के लिए जल कागदी पिकअप वियर से निकलने वाली दाई व बाई मुख्य नहर तक पहुंचाने से संबंधित निर्माण हुआ।

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