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हमारे पास लाॅजिक है लेकिन क्रिएटिव नहीं हैं : डाॅ. मन्ना

Banswara
हमारे पास लाॅजिक है लेकिन क्रिएटिव नहीं हैं : डाॅ. मन्ना
@HelloBanswara -

गाेविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय अाैर माेहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के साझा प्रयासाें से जिले ही नहीं बल्कि शायद संभाग में युवाअाें, विद्यार्थियाें के लिए एंटरप्रेन्याेर बनने की राह सुलभ करने का बेहतरीन अवसर दिया जा रहा है। इसमें शामिल हाेकर मन अाैर दिमाग की नकारात्मकता काे खत्म कर निराशा से बाहर निकलकर एक श्रेष्ठ उद्यमी के रूप में स्वयं काे विकसित किया जा सकता है। साेमवार से शुरू हुए एन्टरप्रेन्याेशिप डेवलपमेंट प्राेग्राम में अपने उद्बाेधन में मुख्य वक्ताअाें ने इसी सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। साेमवार के सेशन के समाप्त हाेने के बाद मुख्य वक्ता एअाईसीटीई के पूर्व निदेशक अाैर यूएनअाे के मैंबर डाॅ. मनप्रीतसिंह मन्ना ने भास्कर से विशेष बातचीत में अपने पूरे सेशन की स्पीच काे सारगर्भित किया। इसमें बेस्ट एंटरप्रेन्याेर के लिए युवाअाें काे ‘’थील’’ का सूत्र, दिया। यानि थिंक, इंक अाैर लिंक। उन्हाेंने कहा कि काेई भी उद्यमिता विकसित करने के लिए जरूरी हैं कि हम साेचे, श्रेष्ठ साेच हाेने पर ही हम अच्छा लिख सकेंगे। जब हमारी लेखनी अच्छी हाेंगी ताे हमारे लिंक भी बढ़ेंगे। उदाहरण के ताैर पर बताएं ताे जब हमारे पास माैजूद स्टाेरी में दम हाेगा ताे डायरेक्टर, प्राेड्यूसर अाैर एक्टर तक हमसें संपर्क करेंगे। यह भी तभी संभव हैं जब हमारे पास लाॅजिक अाैर क्रिएटिविटी हाेगी। लाॅजिक ताे दुनियाभर का हैं अामताैर पर साेशल मीडिया पर किए जाने वाले पाेस्ट से झलकता है, लेकिन क्रिएटिविटी का अभाव है। क्रिएटीविटी अाइडिया अाैर साेच से ही विकसित हाेगी। इस दाैरान बांसवाड़ा से डाॅ. महीपालसिंह राव, डाॅ. अल्का रस्ताेगी, डाॅ. लक्ष्मणलाल परमार, डाॅ. नरेंद्र पानेरी, दिनेश रावत, डाॅ. अशाेक काकाेड़िया डाॅ. मुकेश प्रजापत जुड़े।

एंटरप्रेन्याेर काे रिस्क लेना चाहिए, हमेशा पाॅजिटिव साेचें
जब हम काेई नई शुरुअात करना चाहते हैं ताे समस्याअाें से घिरकर नहीं कर पाते। एक एंटरप्रेन्याेरशिप में सबसे बड़ी बात हाेती है रिस्क लेना। इसके लिए हमें खुद पर भराेसा हाेना बहुत ही जरूरी हाेता है। इसके लिए हमें हमेशा पाॅजिटिव साेच रखनी हाेगी, पाॅजिटिविटी रखने के लिए हैप्पीनेस जरूरी है। कभी अग्रेसिव नहीं हाेना, इससे इमेज खराब हाेने की संभावना रहती है अाैर काम बिगड़ते हैं। इसी कार्यक्रम के दाैरान एक सहभागी ने सवाल किया कि मुझे किस क्षेत्र में एंटरप्रेन्याेर बनना चाहिए ताे डाॅ. सिंह ने जवाब दिया कि ये तुम्हें काेई नहीं बता सकता। इसका उत्तर तुम्हें स्वयं ही खाेजना हाेगा। क्याेंकि तुम्हारी काबिलीयत तुम्हारे पास है। सेशन शुरू हाेने से पहले उद्घाटन समाराेह में मुख्य अतिथि कुलपति जीजीटीयू कैलाश साेडाणी, प्राे. एनएस राठाैड़ कुलपति एमएलएसयू थे। समन्वयक प्राे. अनिल काेठारी ने अतिथियाें का स्वागत किया। प्राे. राठाैड़ ने बताया कि काेविड 19 की विषम परिस्थितियाें में भी युवा वर्ग अपनी क्षमताअाें का विकास कर सकता है। प्राे. साेडाणी ने कहा कि यह दाैर पूरी तरह से अाधुनिक अाैर टेक्नाेलाॅजी अाधारित हाे गया हैं, जिसके साथ चलना ही हाेगा।

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