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सूरत से 373 किमी पैदल चलकर बांसवाड़ा पहुंचे 23 मजदूर

Banswara
सूरत से 373 किमी पैदल चलकर बांसवाड़ा पहुंचे 23 मजदूर
@hellobanswara -

बांसवाड़ा | कोरोना की वजह से बाजार बंद होने से कई कामगार बांसवाड़ा लौट रहे हैं। मंगलवार को सूरत में काम ठप हो जाने से 23 कामगार लौट आए। रोडवेज और निजी बस सेवा बंद होने से इन कामगारों ने तीन दिन तक पैदल ही सफर तय किया। सभी दानपुर के कटुंबी क्षेत्र के कुशाला तोलिया गांव से हैं। कामगारों में 5 महिलाएं भी शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि बॉर्डर पर इनकी किसी ने सेहत नहीं जांची। ऐसे में कोरोना को लेकर प्रशासन की ओर से बॉर्डर सील करने और हर आने-जाने वाली की जांच करने के दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं। गुजरात से बांसवाड़ा आने पर मोनाडूंगर में स्क्रीनिंग पाइंट लगाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन माथे पर बैग रखे, 5 महिलाओं के साथ 23 जनों के बिना किसी जांच के ठीकरिया में पहुंचने की तस्वीर कुछ अाैर ही बया कर रही है। दाहोद नाके पर पुलिस की ओर से की गई नाकाबंदी पर सभी को रोक लिया और जानकारी लेने के बाद सभी की स्क्रीनिंग के लिए एमजी अस्पताल भेजा गया।

चाय-बिस्किट से गुजारे तीन दिन, रात को चलते ताकि धूप न लगे
सूरत में एकाएक मार्केट बंद हो गया। हमारी मजदूरी चौपट हो गई। रविवार शाम 5 बजे हम सभी 23 जने सूरत के गोल्डन चौकड़ी पर इकट्ठा हुए। बस सेवा बंद हो चुकी थी। कुछ बसें थी वो यात्रियों से ओवरलोड थी। टिकट के भाव दोगुने-तीगुने हो चुके थे। हम 23 जने थे। हमारे पास इतने रुपए भी नहीं थे। इसलिए हमने पैदल चलना ही तय किया। हमें पता था कि बांसवाड़ा 373 किमी के करीब दूर है। हमारे साथ 4 महिलाएं और 4 बच्चे भी थे। रोज 125 किमी चले। दिन में धूप लगती इसलिए रात को पैदल निकलते। रास्ते में कोई दुकान खुली नजर आ जाती तो चाय-बिस्किट ले लेते। दुकान-होटलें बंद थी और हमारे पास इतने रुपए भी नहीं थे कि भोजन कर सकें। तीन का सफर तय कर बांसवाड़ा पहुंचे। ठीकरिया तक पहुंचकर हम इतने थक चुके थे कि वहां एक घंटे तक इंतजार किया। हमें डर था कि बॉर्डर पर हमें रोक दिया जाएगा। लेकिन, किसी ने नहीं रोका। सिर्फ पुलिस ने एक जगह रोका और जानकारी ली थी। 

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