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पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के मतदान में दाे दिन शेष, भाजपा जिलाध्यक्ष और कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष के अपने-अपने दावे

Banswara
पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के मतदान में दाे दिन शेष, भाजपा जिलाध्यक्ष और कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष के अपने-अपने दावे
@HelloBanswara -
  • किस बात का इगाे, मालवीया पहले मंत्री थे, अब विधायक हैं - चांदमल
  • जिला प्रमुख एक ही बनेगा, बाकी काे एडजस्ट करेंगे - गाेविंद सिंह

 

जिले में चार चरणाें में हाेने वाले पंचायत चुनावाें के प्रथम चरण का मतदान शुरू हाेने में दाे दिन शेष बचे हैं। दाेनाें ही दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। दोनों ही पार्टी जिला प्रमुख और प्रधान बनाने के लिए अपने-अपने दिग्गजों को मैदान में उतार रही है। जिला प्रमुख एवं प्रधान पद के लिए कई दिग्गजों के चेहरे सामने आ रहे हैं। ऐसे में यदि कोई एक जीतता है तो दूसरे का इगो हर्ट होगा। उनके जीत के दावाें का आधार क्या है। जिला प्रमुख बनने के लिए खींचतान ताे नहीं हाेगी। वरिष्ठ नेताओं का इगो ताे नहीं टकराएगा। इन सवालाें पर भास्कर ने कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष चांदमल जैन व भाजपा जिलाध्यक्ष गाेविंद सिंह राव से बातचीत की।

सवाल-पंचायत चुनावों में पार्टी की क्या स्थिति। कितनी पंचायताें में कांग्रेस का बाेर्ड बन सकेगा? चांदमल-पार्टी पूरी मजबूती से लड़ रही है। सभी 11 पंचायत समितियाें में कांग्रेस का बाेर्ड बने इसके प्रयास कर रहे हैं। जिला परिषद में कांग्रेस का बाेर्ड बनेगा। जिला प्रमुख कांग्रेस का हाेगा] तय है। {इतने दावे के साथ कैसे कह सकते हैं? - केंद्र व राज्य में भाजपा सरकार थी। उस समय हमने जिले की 11 पंचायत समितियाें में से ाठ में बाेर्ड बनाया था। हमारे प्रधान बने थे। अब भाजपा काे इतना प्रभाव नहीं रहा। एेसे में हम निश्चत रूप से सभी पंचायत समितियाें में अपना बाेर्ड बनाने की स्थिति में अागे बढ़ रहे हैं। {बीटीपी भी चुनाव मैदान में है। कई सीटाें पर हार-जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कांग्रेस काे कितना नुकसान हाेगा? - बीटीपी का इतना प्रभाव नहीं है। जिन क्षेत्रों में इसका प्रभाव है, वहां कांग्रेस व भाजपा दाेनाें काे ही नुकसान पहुचाएगी। लेकिन भाजपा काे नुकसान अधिक हाेगा। {कांग्रेस से इस बार वरिष्ठ नेता राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त कर चुके पूर्व संसदीय सचिव नानालाल निनामा व पिछले दस सालाें से लगातार जिला प्रमुख रही रेशम मालविया व टीएडी मंत्री का पुत्र विकास बामणिया भी जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रहें हैं? - भाजपा के सभी बड़े नेता जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में हमारी पार्टी के भी सभी बड़े नेताओं के चुनाव लड़ने से कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में मेहनत कर रहें हैं। एेसे में कांग्रेस प्रत्याशियाें की जीत सुनिश्चित हाे रही है। {पार्टी के दिग्गज नानालाल, रेशम मालविया व अन्य चुनाव ताे जीत जाएंगे। जिला प्रमुख उनमें से काेई एक बनेगा। बाकी अपनी वरिष्ठता काे छाेड़ कर उनके सामने जिला परिषद सदस्य के रूप में बैठ पाएंगे। उनका इगाे हर्ट नहीं हाेगा? - किस बात का इगाे। पहले महेंद्र मालवीया सरकार में मंत्री रहे हैं। अब विधानसभा में केवल सदस्य के रूप में बैठ ही रहे हैं। इसके बावजूद सभी मिलकर पूरी एकजुटता के साथ काम कर रहें हैं। {भाजपा में पूरा संगठन जुटा हुा है। कांग्रेस में केवल कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अकेले ही हैं। बिना कार्यकारिणी के कैसे चुनाव जीतेंगे? - एेसी बात नहीं हैं। कांग्रेस के जितने पूर्व ब्लाॅक अध्यक्ष, वार्ड अध्यक्ष व उनकी कार्यकारिणी थी। उन सभी काे अपने पदाें पर मानते हुए जिम्मेदारी दे रखी है। सभी पूरी निष्ठा व मेहनत से पार्टी के पक्ष में काम कर रहें हैं। इनके अलावा पांचों विधानसभा क्षेत्राें में हमारे विधायक व जाे विधायक प्रत्याशी रहे थे। उन्हें अपने-अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी दे रखी है। सभी काे चुनावों में लगाने से परिणाम हमारे पक्ष मेंं अाएंगे।

सवाल- पंचायत चुनावाें में भाजपा की क्या स्थिति है। कितनी पंचायताें में बाेर्ड बना लेंगे? गाेविंदसिंह- पहली बार भाजपा पंचायत चुनावाें में इतनी मजबूत स्थिति में है। जनता भारी बहुमत से सभी 11 पंचायत समितियाें व जिला परिषद में भाजपा का बाेर्ड बनाने का मानस बना चुकी है। अाज आनंदपुरी क्षेत्र के दाैरे पर था। वहां जनता का इतना सहयाेग मिल रहा है कि तीनाें वार्ड जीतेंगे। जब हम आनंदपुरी जीत सकते हैं ताे बाकी जगह क्याें नहीं। {इतने दावे के साथ यह बात कैसे कह सकतें हैं? - राज्य सरकार के पिछले 2 सालाें के नाकारा कार्यकाल, काेविड-19 के कुप्रबंधन, किसानों के किए गए वादाें काे पूरा नहीं करना जैसे अनेक कारणाें से ग्रामीण क्षेत्राें में इस सरकार के खिलाफ गहरा अाक्राेश है। यही कारण है किसी भी पंचायत समिति में इस बार कांग्रेस का खाता भी नहीं खुलेगा।

{बीटीपी की उपस्थिति से क्या प्रभाव पड़ेगा? - बीटीपी के लड़ने से कांग्रेस काे ही नुकसान हाेगा। उसी के वाेट बंटेगे। भाजपा काे ताे इसका सीधा फायदा मिलेगा। {भाजपा से इस बार कई दिग्गज चुनाव लड़ रहे हैं। हकरू मईड़ा, राजेश कटारा, धर्मेंद्र राठाेड़, प्रेमशंकर कटारा व अन्य भी? - यह सभी पार्टी के अाग्रह पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से किसी ने भी अागे चलकर टिकट नहीं मांगा था। पार्टी हर हाल में सभी वार्ड जीतना चाहती थी। एेसे में सभी वरिष्ठाें काे चुनाव लड़वा रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव अास-पास की सीटाें पर भी पड़ेगा। भाजपा सभी सीटें जीत सकेगी। {चुनाव जीतने के बाद जिला प्रमुख के लिए इनका इगाे नहीं टकराएगा? - भाजपा कार्यकर्त्ता अाधारित पार्टी है। जाे भी दिग्गज चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें पता है कि उनमें से काेई एक जिला प्रमुख बनेगा। जाे भी जिला प्रमुख पद के लिए निर्धारित याेग्यता रखते हैं, वह सभी दावेदार हाे सकतें हैं। दावेदार हाेना काेई गलत बात नहीं। लेकिन पार्टी ने अभी काेई प्रत्याशी तय नहीं किया है। चुनाव परिणामाें के बाद सामूहिक चर्चा हाेगी। जाे भी प्रदेश नेतृत्व का निर्णय हाेगा। सभी काे मंजूर हाेगा। एक जिला प्रमुख बनेगा। बाकियाें के लिए अन्य सभी विकल्प खुले हैं। उन सभी काे एडजस्ट करेंगे।

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