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24 घंटे इलाज के दावे वाली व्यवस्था का सच - स्टाफ ने बिना देखे रवाना किया, सास ने आदर्श अस्पताल के सामने सड़क पर कराया प्रसव

Banswara
24 घंटे इलाज के दावे वाली व्यवस्था का सच - स्टाफ ने बिना देखे रवाना किया, सास ने आदर्श अस्पताल के सामने सड़क पर कराया प्रसव
@HelloBanswara -

24 घंटे इलाज के दावे वाली व्यवस्था का सच, डेढ़ घंटे तक प्रसव पीड़ा, न डॉक्टर अाया न स्टाफ, प्रसव के बाद भी भर्ती नहीं किया

ये तस्वीर आपको विचलित कर सकती है, लेकिन सरकारी सिस्टम का सच सामने लाने के लिए छापना जरूरी है

करणघाटी गांव की गर्भवती कांतु अाैर उसका परिवार कभी यह दिन भूला नहीं पाएगा। तेज प्रसव पीड़ा पर कांतु के परिजन उन्हें कुशलगढ़ सीएचसी के बजाए माेहकमपुरा अादर्श पीएचसी ले अाए। लेकिन यहां स्टाफकर्मी ने उन्हें देखा तक नहीं अाैर रवाना कर दिया। तेज पीड़ा थी इसलिए गर्भवती अस्पताल के बाहर सड़क पर लेट गई। उसकी सास मैना खुले में प्रसव की तैयारी करने लगी। तेज शाेर सुनकर सैलून संचालक पप्पू भाई अाए अाैर चद्दर की अाड़ की। डेढ़ घंटे तक गर्भवती तड़पती रही, लेकिन अस्पताल से काेई नहीं अाया। सड़क पर प्रसव कराया गया।

बच्ची के जन्म के बाद आयुर्वेद मेल नर्स खानचंद पहुंचा अाैर नाल काटकर बाहर से ही जाने के लिए बाेल दिया। 24 घंटे इलाज की सुविधा के दावे वाले इस अस्पताल में काेई स्टाफ नहीं था। प्रभारी डाॅक्टर प्रियंका भी नहीं अाई। परिजनाें ने कहा कि कांतु पत्नी मानसिंग को प्रसव पीड़ा होने पर छोटी सरवा सीएचसी प्रसव कराने ले गए थे। वहां से कुशलगढ़ सीएचसी के लिए रैफर किया। निजी वाहन से उसे कुशलगढ़ के लिए ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में असहनीय दर्द होने से मोहकमपुरा ले आए। हमें क्या पता था कि यहां इस तरह की यातना मिलेगी। मौजूद स्टाफ ने बिना कुछ देखे कुशलगढ़ ले जाने की कहकर बाहर निकाल दिया। प्रसव के बाद सरकारी सिस्टम पर भराेसा खाे चुके परिजन कांतू काे घर ले जाने लगे। बीच रास्ते में कुछ पुलिसकर्मियाें की समझाइश पर वे उसे कुशलगढ़ सीएचसी ले गए अाैर भर्ती कराया। इस संबंध में पीएचसी की इंचार्ज डाॅ. प्रियंका से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फाेन नहीं उठाया।

आदर्श का दर्जा इसलिए...
24 घंटे इलाज और भर्ती करने की सुविधा
किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को आदर्श का दर्जा मिलने के साथ ही वहां पर पूरा स्टाफ यानी आयुष डॉक्टर, एमओ और नर्सिंगकर्मी होते हैं। जो परिसर में बने सरकारी क्वार्टर में ही रहते हैं। वहां पर 24 घंटे इलाज के साथ भर्ती करने की सुविधा भी होती है। यानी संस्थागत प्रसव की पूरी सुविधा, निशुल्क जांच योजना के तहत 15 प्रकार की जांच और सभी प्रकार की दवाइयां होती हैं।

विधायक के निरीक्षण में भी काेई नहीं मिला था
मोहकमपुरा सरपंच पिता और समाजसेवी नारजी भाई भी मौके पर पहुंचे और मोहकमपुरा पीएचसी के हालात की जानकारी विधायक रमीला खड़िया सहित चिकित्सा अधिकारियों को दी। ग्रामीण गणेशलाल डिंडोर, कमलेश राठौर, विशाल, सोहन भाई आदि ने बताया कि पीएचसी का स्टाफ रात को भी कोई नहीं रुकता है, ऐसे में रात में आने वाले मरीज परेशान होते हैं। काेराेना संक्रमण के शुरुआती दिनों में विधायक रमीला खड़िया ने भी पीएचसी का निरीक्षण किया था उस वक्त भी कई कमियां व लापरवाही सामने आई थी।

स्टाफ अकेला था, इसलिए कुशलगढ़ जाने के लिए कहा होगा: सीएमएचओ
मैंने पूरी जांच की है, जिस समय गर्भवती पहुंची उस समय एक ही नर्सिंगकर्मी था। अन्य की ड्यूटी 10वीं की परीक्षा में स्क्रीनिंग के लिए लगी हुई थी, इसलिए वहां गए थे। इसलिए स्टाफ ने उसे कुशलगढ़ जाने के लिए कहा था। हालांकि प्रसव हाेने के बाद भी प्रसूता काे भर्ती नहीं किया, डॉक्टर का नहीं हाेना अादि लापरवाही के लिए उन्हें नोटिस दिया गया है। कुशलगढ़ बीसीएमओ काे कार्रवाई के लिए निर्देश दिए हैं।
डाॅ. एचएल ताबियार, सीएमएचअाे

नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही है, कार्रवाई जरूर करेंगे
मोहकमपुरा अस्पताल में स्टाफ ने जांच के बाद महिला के पहले से चार बच्चे होने और उम्र में होने से जांच के बाद कुशलगढ़ ले जाने के लिए कहा। अस्पताल से बाहर आते ही महिला का प्रसव हो गया। कायदे से स्टाफ को 104 या 108 एंबुलेंस से महिला को कुशलगढ़ भेजना था। बाहर डिलेवरी होने के बाद प्रसूता को अंदर तक नहीं ले जाने की जानकारी मिली है। मोहकमपुरा पीएचसी में स्टाफ की लापरवाही है। नियमानुसार विभागीय कार्रवाई करेंगे। डाॅ राजेंद्र उज्जैनिया, बीसीएमओ, कुशलगढ़

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