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प्रतापगढ़ : बरडिय़ा गांव में देव-दानवों का युद्ध देखने उमड़े ग्रामीण, परंपरागत तरीके से हुआ देव-दानव का युद्ध

Pratapgarh
@HelloBanswara -

प्रतापगढ़. जिले के रठांजना थाना इलाके के बरडिया गांव में शारदीय नवरात्र की नवमी को  परम्परागत देवता और दानव के युद्ध का मंचन किया गया। नवरात्र की शुरुआत में बोए गए जवारा के विसर्जन के दौरान गांव के सभी देवरों और मंदिरों से ढोल नगाड़े के साथ जुलूस निकाला गया। गांव के मनीष शर्मा ने बताया कि ने बताया कि गांव के बाहर प्रतापगढ़-नीमच मुख्य मार्ग पर स्थित देवनारायण मंदिर परिसर में लोग इकट्ठे हुए। देवनारायण मंदिर प्रांगण में हर साल की तरह ही इस बार भी देवासुर संग्राम का मंचन किया गया। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां जुटे। भारी जन सैलाब के बीच देवनारायण की पाती मिलने के बाद देवासुर संग्राम शुरू हुआ। जो लगभग 40 से 50 मिनट तक चला। इसमें देवता और राक्षसों के बीच कंधे से कंधा टकरा कर युद्ध लड़ा गया। जिसमें मंचन किया गया कि महिषासुर नामक राक्षस मां अंबे को मारने के लिए आया था। तब दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। माता ने महिषासुर का वध कर दिया। मरने से पहले राक्षस राज ने मोक्ष की प्रार्थना की। इस पर मां अंबे ने उस पर दया कर उसे वरदान दिया कि तेरा नाम मेरे नाम के साथ हमेशा अमर रहेगा और मुझे महिषासुर मर्दिनी देवी के नाम से भी जाना जाएगा। महिषासुर मर्दिनी देवी का मंदिर नीमच-प्रतापगढ़ मुख्य मार्ग पर गांव बरडिया में स्थित है। इसी मंदिर के सामने देवासुर संग्राम का आयोजन कई सालों से किया जा रहा है।


 

सालों पुरानी परम्परा

मंदिर के पुजारी ने बताया कि देवासुर संग्राम की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। देवासुर संग्राम को देखने के लिए आस-पास के गांव काजली खेड़ा, काजली, कोलवी, थड़ा, रठांजना, भमेरिया, सामन्तपुरा, खेरमगरी, फोफलिया, हरवार, जीरन, उगरान, मध्यप्रदेश सहित कहीं जगह से श्रद्धालु इस देव-दानव युद्ध के मंचन को देखने पहुंचे।

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