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5.75 करोड़ खर्च कर श्यामपुरा जंगल को बनाएंगे महात्मा गांधी नेचर पार्क

Banswara
5.75 करोड़ खर्च  कर श्यामपुरा जंगल को बनाएंगे महात्मा गांधी नेचर पार्क

शहर के सबसे नजदीक 70 हैक्टेयर में फैले श्यामपुरा वनक्षेत्र को महात्मा गांधी नेचर पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने 5 करोड़ 75 लाख की योजना बनाई है। महात्मा गांधी की 150 जयंती के उपलक्ष्य में विभाग ने इसके विकास को लेकर ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। इस नेचर पार्क में तितली पार्क, योगा पार्क, ओपन जिम के अलावा जंगल सफारी का भी लुप्त उठा सकेंगे। इसके लिए विभाग से स्वीकृति का इंतजार है।

श्यामपुरा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि, नए सभापति जैनेद्र त्रिवेदी भी इसे बॉयोलाॅजिकल पार्क के रूप में विकसित कराने की मंशा जाहिर कर चुके है। वन अधिकारियों का भी मानना है कि यहां बॉयोलाॅजिकल पार्क बनाने के लिए पर्याप्त जगह और वनक्षेत्र मौजूद है। वन विभाग का मानना है कि यहां सुनियोजित तरीके से पार्क विकसित किया जाए तो यह बड़ा टूरिज्म पाइंट बन सकता है। इसके अलावा बांसवाड़ा में पाई जाने वाली औषधीय प्रजातियों की गैलरी बनाकर भी स्थानीय लोगों को इनके बारे में जानकारी दी जा सकती है। सहायक वनसंरक्षक शैदा हुसैन बताते है कि श्यामपुरा वनक्षेत्र को शहर की ऑक्सीजन फैक्ट्री कहा जाता है। यहां पूर्व में कई योजनाओं में पौधरोपण और दूसरे विकास काम करवाए गए। जिससे यहां एक बेहद खुबसुरत और घना जंगल तैयार हो चुका है। इस जंगल के चारोओर कॉलोनियां विकसित हो चुकी है। शहर से सटा होने से इसे महात्मा गांधी नेचर पार्क के रूप में शहरवासियों के लिए नए पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करना होगा। इसकी कार्ययोजना के प्रस्ताव तैयार कर दिए गए है। विभाग से हरी झंडी मिलने पर काम शुरू किया जा सकेगा।

यह है श्यामपुरा की खासियत - शहर से श्यामपुरा जंगल में पूर्व में जंगल के भीतर जाने के लिए बनाया गया कच्चा रास्ता।

ये काम कराने प्रस्तावित - जंगल सफारी और हाईटेक कैंटिन की सुविधा भी

70 हैक्टेयर के विशाल एरिया में फैले इस क्षेत्र में सैलानी जंगल सफारी का भी लुप्त उठा सके इसके लिए 80 लाख की लागत से विशेष ट्रैक बनाया जाएगा। यहां आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए 20 लाख की लागत से कैंटिन और 10 लाख की लागत से दो बॉयो-टॉयलेट बनाया जाना भी प्रस्तावित है। श्यामपुरा वन क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं या परिजनों के जन्मदिन और पूवर्जों की पुण्यतिथि पर आकर पौधरोपण भी कर सकता है। यह सुविधा वन विभाग ने पहले से कर रखी है।

source db

 

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