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दशहरा लाइव : खेल मैदान में 10 दिनों से बन रहे रावण, मेघनाद, कुंभकरण का 10 मिनट में खेल खत्म

Banswara
दशहरा लाइव : खेल मैदान में 10 दिनों से बन रहे रावण, मेघनाद, कुंभकरण का 10 मिनट में खेल खत्म
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खेल मैदान में 10 दिनों से बन रहे रावण, मेघनाद, कुंभकरण का 10 मिनट में अंत हो गया। रावण काे जलाने से पहले मेघनाद और कुंभकरण को जलाने में ही काफी मशक्कतें करनी पड़ी। ठीक 7.20 बजे हनुमान ने लंका को जला दिया। इसके बाद मेघनाद कुंभकरण और रावण का दहन की प्रक्रिया शुरू हुई।राम और लक्ष्मण को तो प्रतीकात्मक तौर पर खड़ा रखा, लेकिन इस रामायण में राम कलेक्टर अंतरसिंह नेहरा, लक्ष्मण पुलिस अधीक्षक केसरसिंह शेखावत बने। 7.32 बजे एसपी ने मेघनाद को जलाने के लिए रस्सी जलाई जाे मेघनाद के मुंह तक पहुंचने से पहले ही बुझ गई। फिर मेघनाद को मशाल से पांवों के पास से जलाया। इससे मेघनाद का धड़ और मुंह तो जल गया, लेकिन उसके हाथ सही सलामत रहे। सभापति मंजूबाला पुरोहित काे कुंभकरण को जलाने का जिम्मा सौंपा गया। उन्हाेंने रस्सी जलाने के लिए हाथों में चिंगारी भी थामी, लेकिन ठीक से रस्सी को जलाने से पहले ही चिंगारी हाथ से छोड़कर पीछे चली गई।वे चिंगारी से डरती दिखी। इसके बाद फिर से रस्सी को जलाया। लेकिन कुंभकरण नहीं जला। करीब 3 मिनट तक इंतजार के बाद भी कुंभकरण ने आग नहीं पकड़ी तो उसे भी मशाल से सीधे जलाना पड़ा। कलेक्टर अंतरसिंह नेहरा ने रावण काे अाग लगाई। महज डेढ़ मिनट में रावण पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

2.80 लाख की आतिशबाजी बहुरंगी 511 पटखों ने किया राेमांचित

आतिशबाजी का नजारा लुभाने वाला रहा। सतरंगी आसमां को हर कोई अपने कैमरे में कैद करता रहा। पौन घंटे के आतिशबाजी के लिए नगर परिषद की ओर से करीब 2.80 लाख रुपए खर्च किए। डूंगरपुर से आए उस्मान भाई ने बताया कि इस बार आतिशबाजी में मल्टीकलर 511 शॉट वन बाय वन छोड़े गए। इससे करीब 15 मिनट तक आसमान में राेशनी रही। इसके अलावा फूलाें का गुलदस्ता, कबान झाड़, करंट फूल, मल्टी कलर-हवाई लंका, डबल साउंड, राउंड साउंड, करंट फूल झाड़, कमांड झाड़, कृष्ण चक्र, सिल्वर रैन, गोल्डन रैन, कलर झूमका, छम्मा छम्मा, नीला गगन, उल्का पिंड, एयर फाइटर, गंगा की लहरें, जुगनू की बरसात, फिरत मल्टी कलर, घूमर चकरी, अनार आदि की आतिशबाजी की गई।

तीनों पुतलों के मुंह में विसल पटाखा, 7.42 नी सबका खात्मा :

रथ से उतरते ही कलाकारों ने हनुमान रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों के चारों और तीन-चार बार चक्कर लगाए। रावण का दहन करते ही उसके सिर से अंगारे निकलने लगे। 7.32 पर मेघनाद, 7.37 पर कुंभकरण और 7.42 पर रावण के साथ पूरा परिवार जल गया। इस बार तीनों के मुंह में विसल का विशेष पटाखा रखा गया था।

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