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सरकारी अस्पतालों में सफाई कर्मचारी करवा रहे हैं प्रसव, देख पूरी रिपोर्ट

10 Feb 2019 07:08 am

लेबर रूम्स का सच-1  डॉक्टर, नर्स प्रसूताओं को हाथ तक नहीं लगाते  ड्रिप से डिलीवरी तक सब कुछ सफाईकर्मी, वार्ड बॉय के जिम्मे  

यह पूरा स्ट्रिंग भास्कर ने किया है।

डिस्क्लेमर : मुद्दा महिलाओं की निजता से जुड़ा है। भास्कर इसका सम्मान करता है। इसलिए इस खबर के लिए भास्कर का कोई भी पुरुष रिपोर्टर लेबर रूम्स के अंदर नहीं गया। स्टिंग में बाल व महिला चेतना समिति भीलवाड़ा की अध्यक्ष  तारा अहलुवालिया, अनिता कुमावत ने भास्कर के लिए लेबर रूम्स की तस्वीरें खुफिया कैमरों में कैद कीं।  

24 साल की दीक्षा कंवर 7 जनवरी का वो दिन कभी नहीं भूल सकती। जैसलमेर के रामगढ़ में डिलीवरी के दौरान मेल नर्स ने उसके शिशु को इस तरह खींच लिया कि उसके दो टुकड़े हो गए। नौ महीने जिस जीवन को दीक्षा ने सींचा...उसका ऐसा अंत...किसी की भी रूह कांप जाए। जो दर्द दीक्षा ने झेला कुछ वैसा ही दर्द राजस्थान के हर सरकारी अस्पताल में आने वाली महिलाएं रोज झेल रही हैं।

जैसलमेर की घटना के बाद भास्कर ने राज्य के सरकारी लेबर रूम्स का स्टिंग किया। भास्कर ने 13 जिलों के 92 अस्पतालों का दौरा किया। प्रदेश के प्रसव केंद्र अनट्रेंड स्टाफ के भरोसे मिले। उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा जिलों की आदिवासी महिलाओं और उनके परिजनों को तो यह भी नहीं पता कि उनका प्रसव कराने वाला व्यक्ति कौन है? लापरवाही का आलम यह था कि अस्पतालों से डॉक्टर गायब थे। सफाई कर्मचारी प्रसव करा रहे थे। 

 

सफाई कर्मचारी हीरालाल प्रसव करवाता मिला

बांसवाड़ा के घाटोल स्वास्थ्य केन्द्र की है। यहां सफाई कर्मचारी हीरालाल प्रसव करवाता मिला। उसने महिला के कपड़ों से ही लेबर टेबल साफ की। फिर उसी गंदे कपड़े से महिला के शरीर पर खून साफ किया। जीएनएम कैलाश रजिस्टर की खाना-पूर्ति कर रही थीं। कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। यहीं पर एक दूसरा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामा नशे में मिला। बोला- हजारों डिलीवरी करा चुका हूं। वो हीरालाल क्या जानता है।

हमारी सरकार प्रसव केन्द्रों और लेबर रूम को लेकर संवेदनशील है। हमने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को निजी अस्तपालों के लेबर रूम का अध्ययन करने भेजा है। ताकि उनकी तर्ज पर सरकारी लेबर रूम के हालात सुधारे जा सकें। - रघु शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री


By Bhaskar

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