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सामान्य जांचें भी निजी लैब में करवा रहे सरकारी डॉक्टर

सामान्य जांचें भी निजी लैब में करवा रहे सरकारी डॉक्टर
@HelloBanswara -

महात्मा गांधी अस्पताल में 60 हजार से 2 लाख तक का वेतन लेने वाले डॉक्टर अधिक रुपए कमाने के लिए प्रेक्टिस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इनकी सांठगांठ तो बाहरी निजी लैब और मेडिकल स्टोर तक है। जहां से मरीजों को पर्ची पर लिखकर दवा खरीदने और जांच करने के लिए बाध्य किया जाता है।

एक पर्ची हाथ लगी है, जिस पर अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज को वहां कार्यरत डॉक्टर ने लेबोरेट्री की जांच महात्मा गांधी अस्पताल से कराने के बजाय एक निजी- गेट वेल लेब से कराने को कहा गया। इसके साथ ही डॉक्टर अश्विन पाटीदार ने पर्ची पर अपनी सील भी लगाई जिस पर अपना नंबर तक लिखा गया। पर्ची पर एमपी, विडाल और डब्ल्यूबीसी की जांचें लिखी गई जो सामान्य जांच होने के साथ महात्मा गांधी अस्पताल में भी इसकी निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। यह एक ही डॉक्टर का मामला नहीं बल्कि पूर्व में भी कई डॉक्टरों द्वारा बाहर की जांच और दवा लिखने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जानकारी के अनुसार डॉक्टरों की इन लेब और मेडिकल स्टोर से सीधे सांठगांठ होती हैं जहां से कमीशन मिल जाता है। इसी के चलते अस्पताल की जांच पर भरोसा नहीं करके निजी लैब पर मरीजों को भेजा जाता है।उधर, नॉन प्रेक्टिस अलाउंस लेने के बाद भी घरों पर प्रेक्टिस कर रुपए बटौरने के भ्रष्टाचार के मामले का भास्कर में खुलासा करने के बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया है। पीएमओ डॉ. सर्वेश बिसारिया ने इस मामले को गंभीर बताते हुए विशेष जांच टीम बनाकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि दो दिन अवकाश की वजह से यह कार्रवाई नहीं हो पाई है। निश्चित तौर पर दोषी साबित होने पर एनपीए की रिकवरी कराई जाएगी। 

मरीज के कहने पर ही लिखी थी जांच: पाटीदार  
बाहर की जांच लिखने पर डॉक्टर अश्विन पाटीदार से बात की तो उन्होंने बताया कि यह बहुत पुराना मामला है। मरीज इमरजेंसी में आया था, उस दौरान जांच लिखी थी, उसे तुरंत रिपोर्ट चाहिए थी, लेकिन अस्पताल में जांच का समय समाप्त हो चुका था। इस कारण उसके कहने पर ही बाहर की जांच लिखी और बाद में रिपोर्ट दिखाने के लिए पर्ची पर नंबर लिखा था, ताकि उसके आधार पर आगे का इलाज कर सकें। इस मामले में पीएमओ से भी बात हो चुकी थी।  

इन्क्वायरी के बाद करेंगे रिकवरी- एमडी  
 प्रेक्टिस के साथ एनपीए उठाना गलत है। इस प्रकरण में ज्वाइंट डायरेक्टर से इन्क्वायरी करने का कहा गया है। साथ ही वित्त विभाग के सर्कुलर के हिसाब से एक्शन लेते हुए रिकवरी कराई जाएगी। डॉ. समित शर्मा, एमडी, एनएचएम 

 

By Bhaskar

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