ऐसा परिवार जो बनाता है 5 तारों की वीणा, सितार की तरह भी बजा सकते हैं

Updated on February 10, 2019 Other
ऐसा परिवार जो बनाता है 5 तारों की वीणा, सितार की तरह भी बजा सकते हैं  , Banswara "शौक में बनाना सीखा अब बन गया रोजगार का जरिया, मेले में ही मिलते हैं इसके खरीदार "

ऐसा परिवार जो बनाता है 5 तारों की वीणा, सितार की तरह भी बजा सकते हैं  
बसंत पंचमी विशेष : शौक में बनाना सीखा अब बन गया रोजगार का जरिया, मेले में ही मिलते हैं इसके खरीदार  

वागड़ में एक परिवार है जो पांच तारों की वीणा बनाता है। नवागांव के पास बोकड़ाखेड़ा गांव में जंगल के बीच बने महादेव मंदिर के सेवक केरेंग का परिवार न केवल वीणा बजाने में बल्कि बनाने की विद्या में पूरी जानकारी रखते है। जिन्होंने बचपन में शौक-शौक में इसे बजाने और बनाने की कला सीखी, लेकिन अब वही उनके रोजगार का जरिया बन चुकी है। केरेंग के बड़े बेटे 40 वर्षीय जीवा बताते हैं कि वीणा को तानपुरा या तंबूरा भी कहा जाता है। यूं तो ये 4 तारों का ही होता है, लेकिन मुगलों के जमाने में सितार ने इसकी जगह ले ली, जिसमें 5 या 7 तार होते थे। इस वजह से वह भी अपनी वीणा में 5 तार लगाते हैं, इससे वादक को अधिक ध्वनि निकालने में आसानी होती है। वे बताते है कि वीणा में सबसे खास उसके नीचे की गोलाई और लकड़ी होती है। जिसमें ध्वनि गूंजती है। इसके हत्थे को भी अंदर से खोखला बनाया जाता है। जीवा ने बताया कि उनके पिता करेंगे ने करीब 40 साल पहले जंगल में भगवान महादेव का मंदिर बनाया और वहां पर रहकर सेवा करने लगे। ऐसे में आसपास के गांवों के सेवक भी वहां आकर भजन करते थे। उस समय पास के ही गांव का एक कर्मा भगत नाम का व्यक्ति मंदिर में वीणा लेकर आता था। जिसके बजने से भजन और मधुर हो जाता था। कर्मा को वीणा बनाने की कला याद थी, उस समय जीवा व अन्य भाइयों ने कर्मा से वीणा किस तरह बनानी है वह सीखा। जीवा और उनका परिवार भी वीणा बनाने के बाद बेणेश्वर और घोटिया आंबा मेले में इसे बेचने के लिए ले जाते हैं। जीवा सहित उनके 7 भाई हैं, जिसमें अर्जुन, गणेश, कचरू और जगदीश वीणा बनाने की कला को जानते हैं।  
बांसवाड़ा. वीणा तैयार करते जीवा।  
 

सेमल की हल्की लकड़ी का उपयोग  
पांच तारों वाली वीणा बनाने के लिए सेमल की लकड़ी का उपयोग करते हैं। जिसे स्थानीय भाषा में हेमला भी कहा जाता है। इस पेड़ की लकड़ी की खासियत यह होती है कि यह बहुत ही हल्की और सीधी होती है। इसकी लकड़ी पानी में खूब ठहरती है इसलिए इसे नाव बनाने के लिए भी काम में लिया जाता है। इससे वीणा हल्की बनती है और आसानी से उठाई जा सकती है। यदि किसी दूसरी लकड़ी से वीणा को बनाया जाए तो वह भारी होती है, इस कारण वादक उसे उठा नहीं सकता है।  

वीणा में सिर्फ नागौरी तार का ही उपयोग : जीवा बताते है कि वह वीणा में सिर्फ नागौरी तार का ही उपयोग करते हैं। वह इसलिए क्योंकि यह तार काफी पतला तो होता ही है, साथ ही मजबूत भी होता है। लेकिन खास बात यह है कि यह तीखा नहीं होता है। इससे वादक के हाथ नहीं कटते हैं। क्योंकि वीणा की लंबाई 5 फीट होती है इसलिए इसे लेटाकर या खड़ा रखकर किसी भी तरह से बजाया जा सकता है। इसमें कुल 25 फीट लंबा तार प्रयोग में लिया जाता है। इसके हत्थे में ऊपर की ओर 3 और साइड में 2 छेद कर चाबी नुमा आकृति की लकड़ी लगाई जाती है, जिससे वह तारों को कसते हैं। 

 

Dipesh Mehta

By Bhaskar



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