विश्व जल दिवस

Updated on March 22, 2019 Education
विश्व जल दिवस, Banswara "World Water Day"
  • 22-03-2019

22 मार्च को पूरे विश्व में हर वर्ष विश्व जल दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1993 में एक सामान्य सभा के माध्यम से इस दिन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने का निर्णय किया। इस अभियान में लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये जल के महत्व की आवश्यकता और जल संरक्षण के बारे में समझाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाया जाने लगा।

विश्व जल दिवस का इतिहास

इसे पहली बार ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में वर्ष 1992 में पर्यावरण और विकास के लिये संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की अनुसूची क्रमांक 21 में आधिकारिक रुप से  इसे जोड़ा गया था और इस तरह यह वर्ष 1993 से सभी जगह मनाया जाने लगा। विश्व जल दिवस एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है। इसका उद्देश्य पानी से संबंधित मुद्दों के बारे में अधिक जानने और इसके लिये सुधार लाने के लिये यह दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करना है।

विश्व जल दिवस भारत, यू एस ए, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, जापान, घाना, बांग्लादेश, जर्मनी, नाइजीरिया, मिस्र और दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा मनाया जाता है। विश्व जल दिवस पानी और इसके संरक्षण के महत्व पर केंद्रित है। पूरे भारत में कई स्कूलों और कॉलेजों में विश्व जल दिवस पर भाषण और निबंध प्रतियोगिताये होती है और इन प्रतियोगिताओं में आमतौर पर पानी और इसके संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

विश्व जल दिवस क्यों मनाया जाता है
यह अभियान यूएन अनुशंसा को लागू करने के साथ ही वैश्विक जल संरक्षण के वास्तविक क्रियाकलापों को प्रोत्साहन देने के लिये सदस्य राष्ट्र सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता हैं। इस अभियान को प्रति वर्ष यूएन एजेंसी की एक इकाई के द्वारा विशेष तौर से बढ़ावा दिया जाता है जिसमें लोगों को जल मुद्दों के बारे में सुनने व समझाने के लिये प्रोत्साहित करने के साथ ही विश्व जल दिवस के लिये अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का समायोजन शामिल है। इस कार्यक्रम की शुरुआत से ही विश्व जल दिवस पर वैश्विक संदेश फैलाने के लिये थीम (विषय) का चुनाव करने के साथ ही विश्व जल दिवस को मनाने के लिये यूएन जल उत्तरदायी होता है।

पानी की आवश्यकता हर मनुष्यों को है। कहा भी गया है, जल है तो हम हैं या जल ही जीवन है। प्रकृति पर्याप्त जल प्रदान करती है ताकि मनुष्य खा सके और जीवित रह सके। हमारे पास जो कुछ भी है उससे भी ज्यादा होने का लालच रहता है। मनुष्यों ने अपने फायदे के लिए प्रकृति को परेशान करना शुरू कर दिया है। इसलिए प्रकृति के संरक्षण और विशेष रूप से पानी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिन की आवश्यकता थी जिस पर लोगों को प्रकृति के लिए बढ़ती समस्याओं से सतर्क किया जाये और पृथ्वी पर दुनिया हर दिन प्रदूषित होती जा रही है हमें यह जानना जरुरी है कि हम प्रदूषण को कैसे कम कर सकते हैं और हमारी प्रकृति को संरक्षित करते हैं।

दुनिया की दूसरी बात सबसे ज्यादा आबादी जिसमें भारत में पीने योग्य पानी की कमी एक मजबूत समस्या है। भारत में कई राज्य कई गांवों पानी की कमी से पीड़ित हैं जिसके परिणामस्वरूप किसान आत्महत्या तक कर लेते है।  विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य में। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर अत्यधिक निर्भर है और जल की कमी से कृषि बहुत कम होती है क्योंकि बारिश की कमी के कारण कम खेती की पैदावार होती है। इसके अलावा, पानी के संसाधन जो उपयोग के लिए उपलब्ध हैं हमें उनका सही तरीके से उपयोग करना चहिये।

इसी के तहत राजस्थान के जैसलमेर में दिनदयाल शोध संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के तत्वाधान में जल संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ भुवनेश जैन द्वारा जल संस्कृति पर आधारित प्राचीन तकनीकों पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में जल संरक्षण के अच्छे प्रभावों पर भी चर्चा की गयी की क्यों यह आवश्यक है और इनका महत्व क्या है।

इसी तरह विश्व जल दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में भी विश्व जल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रकृति के दोहन को रोकने और जल संरक्षण का संकल्प लेते हुए गायत्री महाकुंड में यज्ञ किया। ग्रामीणों ने इस बात पर सहमति जताई कि वृक्ष तथा पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के प्रति हमारे मन में श्रद्धा होनी चाहिए।

विश्व जल दिवस कैसे मनाया जाता है
पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जल के महत्व की ओर लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये पूरे विश्व भर में विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और क्रियाकलापों के आयोजनों के द्वारा मनाया जाता है जैसे दृश्य कला, जल के मंचीय और संगीतात्मक उत्सव, स्थानीय तालाब, झील, नदी और जलाशय की सैर, जल प्रबंधन और सुरक्षा के ऊपर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचर्चा, टीवी और रेडियो चैनल या इंटरनेट के माध्यम से संदेश फैलाना, स्वच्छ जल और संरक्षण उपाय के महत्व पर आधारित शिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता तथा ढ़ेर सारी गतिविधियाँ। नीले रंग की जल की बूँद की आकृति विश्व जल दिवस उत्सव का मुख्य चिन्ह है।

 

विश्व जल दिवस का थीम
वर्ष 1993 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल”।
वर्ष 1994 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हमारे जल संसाधनों का ध्यान रखना हर एक का कार्य है”।
वर्ष 1995 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “महिला और जल”।
वर्ष 1996 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “प्यासे शहर के लिये पानी”।
वर्ष 1997 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विश्व का जल: क्या पर्याप्त है”।
वर्ष 1998 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भूमी जल- अदृश्य संसाधन”।
वर्ष 1999 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हर कोई प्रवाह की ओर जी रहा है”।
वर्ष 2000 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “21वीं सदी के लिये पानी”।
वर्ष 2001 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वास्थ के लिये जल”।
वर्ष 2002 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विकास के लिये जल”।
वर्ष 2003 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भविष्य के लिये जल”।
वर्ष 2004 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और आपदा”।
वर्ष 2005 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “2005-2015 जीवन के लिये पानी”।
वर्ष 2006 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और संस्कृति”।
वर्ष 2007 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल दुर्लभता के साथ मुंडेर”
वर्ष 2008 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वच्छता”।
वर्ष 2009 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल के पार”।
वर्ष 2010 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वस्थ विश्व के लिये स्वच्छ जल”।
वर्ष 2011 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल: शहरी चुनौती के लिये प्रतिक्रिया”।
:वर्ष 2012 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और खाद्य सुरक्षा”।
वर्ष 2013 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल सहयोग”।
वर्ष 2014 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और ऊर्जा”।
वर्ष 2015 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और दीर्घकालिक विकास”।
वर्ष 2016 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय था "जल और नौकरियाँ"
वर्ष 2017 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय था "अपशिष्ट जल"।
वर्ष 2018 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय था "जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान"।
वर्ष 2019 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय "किसी को पीछे नही छोड़ना (लीवींग नो वन बीहांइड)" है।


पानी  हम सभी  प्राणियों  के जीवन में एक अहम भूमिका निभाता हैं। आज  मनुष्य जल को लेकर बहुत लापरवाह हैं मनुष्य को अपने अलावा किसी और की कोई फ़िक्र नहीं होती हैं। हमने जितनी भी नयी नयी खोजे की हैं, नये नये आविष्कार किये हैं उससे भी कई ज्यादा हमने अपने  संसाधनों का बुरी तरह से दुरुपयोग भी किया है और इससे केवल हमारी ही हानि नहीं हुई है बल्कि जितने भी जीव जंतु इस पृथ्वी पर निवास कर रहे हैं। सभी के अस्तित्व को हमने अपने लोभ के लिये विलुप्तिकरण की ओर पहुंचा दिया हैं।

जैसे कि जंगलों के वृक्षों को काटना, वायु को दूषित करना और पानी को प्रदूषित करना। हम अपने घर को साफ़ सुथरा रखने के लिए अपने घर का कचरा नदियों और नहरो में डाल दिया हैं और इस तरह हमने जल को जहर बना दिया। जो हमारे पेट के अंदर जाकर कई बीमारियों का कारण बनता हैं इसके पीछे केवल हम ही जिम्मेदार हैं। आज के इस शुभ दिन पर हम सभी को यह प्रण लेना चाहिए कि हमें किसी भी तरह से जल को प्रदूषित होने से बचाना है और अपने पर्यावरण का ख्याल भी रखना है।

पृथ्वी का 70% से अधिक भाग पानी से ढका हुआ है और पृथ्वी का पानी का 96.5% महासागरों में है, पीने योग्य पानी की मात्रा पृथ्वी पर कम है। औद्योगीकरण और अन्य मानवीय गतिविधियों ने पानी को प्रदूषित कर दिया है। विश्व जल दिवस पानी और इसके संरक्षण के महत्व पर केंद्रित है।

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