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शनि से नहीं गुरु देव से डरे - भवानी खंडेलवाल

Banswara
शनि से नहीं गुरु देव से डरे - भवानी खंडेलवाल
@HelloBanswara -

आज के इस दौर में सभी इंसान शनि से डरते है और पंडितो ने भी सभी को शनि का प्रकोप बताया है।  मेरा अनुभव भिन्न है शनि से ज्यादा खतरनाक गुरु है।

शनि देव न्यायकर्ता है  वे तुरंत न्याय करते है, अच्छे कर्म का अच्छा एवं बुरे कर्म का बुरा तुरंत फल प्रदान करते है। अलग से स्वर्ग-नरक नहीं है, ये मुनियो के द्वारा कल्पना मात्रा है। लोग अपराध न करे इसके लिए स्वर्ग-नरक की कल्पना की गई है, सभी लोग पृथ्वी लोक पर ही है।  तुरंत फल देने के कारण शनि को क्रूर समझते है। यह विद्वानों की भूल है।

भगवान राम की जन्म कुंडली में कर्क लग्न में गुरु था। गुरु की महादशा चौदह वर्ष की होती है एवं यही चौदह वर्ष उन्होंने वनवास में निकाले।  बृहस्पति देवों के गुरु है।  सोम्य गृह है।  इसकी चाल को समझना किसी के बस की बात नहीं है।  इतिहास में अनेकों उदाहरण है जिनके लग्न में उच्च का गुरु था।

आप सभी ज्ञानी जन अगर ज्योतिष में शोधकर्ता के रूप में देखेंगे तो आप चकित रह जायेंगे। अनुभव के बघर ज्योतिष न बने। राम के प्रथम घर में गुरु ने  मान-सम्मान, ईश्वर सब कुछ दिया परन्तु वो ही उच्च का गुरु था जिसने 14 वर्ष वनवास दिलाया। द्वितीय स्थान में उच्च का गुरु भीष्म पितामाह के था उनसे राज्य का अधिकार छीन लिया, अविवाहित भी रहे , लांछन भी लगे, द्वितीय घर पत्नी के स्वास्थ के भी है,  अतः ता उम्र विवाह नहीं किया। तृतीय गुरु राजा बाली का था उनको पाताल लोक में भेज दिया। आज भी मैने ऐसे कई सरकारी कर्मचारी को देखा है जिसके तीसरा  गुरु है उनकी सर्विस वाकई पाताल लोक, ग्राम में है।चौथे उच्च के गुरु राजा हरीश चंद्र के था, गुरु देव ने सब कुछ छीन लिया, इसमें कुछ सहयोग शनि देव का भी था। पंचम उच्चस्थ गुरु राजा दशरथ, धृतराष्ट के था जिन्होंने संतान का दुःख देखा। द्रोपदी के गुरु छटे घर में उच्चस्थ था जिसने चीरहरण भी करवाया एवं अभद्र शब्दों का सामना करना पड़ा। सप्तम घर में उच्चस्थ गुरु ने गजराज को पत्नी का दुःख था। आठवे उच्चस्थ गुरु रावण के था।  इसी गुरु के कारण रावण की मृत्यु हुई। नवे गुरु उच्चस्थ बाली के था जिससे राज-पाट, पत्नी सभी अपने भाई ने छीन लिया। क्यूंकि सातवीं दृष्टि तीसरे पर थी।दशवे उच्चस्थ गुरु दुर्योधन के था जिसके कारण राज-पाट गए एवं  मृत्यु पूर्व भीम ने उनकी जांगे-पांव तोड़ दिए, दशवा घर पांवो का है। ग्यारहवे लाभ स्थान में गुरु जापान में भिखारी के था जीवन भर भिखारी रहा परन्तु मरने के बाद करोड़ो की धन राशि घर से मिला जिसे बाद में सरकार ने लिया। व्यय घर में उच्चस्थ गुरु ब्रुसली, ओसामा बिन लादेन का था जो मृत्यु का कारण बना।

इसी तरह ज्योतिष प्रेमियों, देवज्ञ को नवीन अनुभव करना चाहिए , मात्र पुरानी पुस्तके पढ़ने से ज्योतिष पूर्ण नहीं है आप अपने नवीन विचार अनुभव करे।  गुरु-चंद्र की युति भी शुभ नहीं होती है देखे हमारी पुस्तक "फलित शिरोमणि"

मैंने तो उच्च के गुरु वाले जातक दुःखी, मानसिक रोगी, कम पढ़े लिखे, सामान्य जीवन यापन करने वाले देखे है परन्तु नीच के गुरु वाले ज्यादा सुखी देखे।

शनि से कभी मत डरो।  राम एवं रावण की एक ही राशि थी परन्तु राम ने रावण को मारा।  कंस एवं कृष्ण की एक ही राशि थी परन्तु कृष्ण ने कंस को मारा। इसके लिए गुरु का विशेष स्थान बल देखना चाहिए।  गुरु-सूर्य की युति होती है तो गुरु सूर्य के बल को कमजोर करता है एवं पिता के स्वास्थ्य को कमजोर करता है।  देखे हमारी "प्रश्न शिरोमणि "।

गुरु-शनि की युति जन्म कुंडली में तो शुभ होती है परन्तु विश्व के लिए अशुभ होती है।  इस समय यह युति चल रही है आगे 2021 में भी रहेगी जो महामारी, भूकंप, सुनामी, रेलवे यान - खान दुर्घटना, एक्सीडेंट, प्राकृतिक प्रकोप एवं  राजा पर भार रहेगा।  इसी तरह से राहु-गुरु मार्च लाभ स्थान में शुभ रहता है बाकी अशुभ रहेगा।  

 

भवानी खंडेलवाल

9414101332

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