बाँसवाड़ा में अपार है पर्यटन स्थल, बस इसे सुव्यवस्थित और प्रदर्शित करने की आवश्यकता है

Updated on September 27, 2018 Govt Health Health
बाँसवाड़ा में अपार है पर्यटन स्थल, बस इसे सुव्यवस्थित और प्रदर्शित करने की आवश्यकता है, Banswara "Too many tourism places in banswara"

विश्व पर्यटन दिवस 2018 में 27 सितम्बर, गुरुवार को मनाया जाएगा।

Banswara September 27, 2018 ये दिन हर साल एक विशेष विषय के साथ लोगों को जागरुक करने के लिये पूरे विश्व में मनाया जाता है। पर्यटन का महत्व और पर्यटन की लोकप्रियता को देखते हुए ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1980 से 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के तौर पर मनाने का निर्णय लिया। विश्व पर्यटन दिवस के लिए 27 सितंबर का दिन चुना गया क्योंकि इसी दिन 1970 में विश्व पर्यटन संगठन का संविधान स्वीकार किया गया था। पर्यटन दिवस की खासियत यह है कि हर साल लोगों को विभिन्न तरीकों से जागरुक करने के लिए पर्यटन दिवस पर विभिन्न तरीके की थीम रखी जाती है। इस साल इस दिवस का थीम रखा गया है,‘टूरिज्म एंड वाटर- प्रोटेक्टिंग आवर कॉमन फ्यूचर'। 

2013 में इस कार्यक्रम का विषय पर्यटन और पानी: हमारे साझे भविष्य की रक्षा था और 2014 में पर्यटन और सामुदायिक विकास। शायद 2015 में इस कार्यक्रम का विषय लाखों पर्यटक, लाखों अवसर होगा। ये दिन हर साल 27 सितम्बर को लोगों को पर्यटन के महत्व के बारे में जागरुक करने के लिये मनाया जाता है।

विश्व पर्यटन दिवस

हर वर्ष आम जनता के लिए एक संदेश यू.एन.डब्ल्यू.टी.ओ. के महासचिव द्वारा इस अवसर में भाग लेने के लिए भेजा जाता है। ये विभिन्न पर्यटन उद्यमों, संगठनों, सरकारी एजेंसियों और आदि के द्वारा बहुत रुचि के साथ मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएँ जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये फोटो प्रतियोगिता, मुफ्त प्रवेश के साथ पर्यटन पुरस्कार प्रस्तुतियाँ, आम जनता के लिये छूट/ विशेष प्रस्ताव आदि आयोजित किये जाते हैं।

पर्यटकों के लिए विभिन्न आकर्षक और नए स्थलों की वजह से पर्यटन दुनियाभर में लगातार बढ़ने वाला और विकासशील आर्थिक क्षेत्र बन गया है। तो यह विकासशील देशों के लिए आय का मुख्य स्रोत बन गया है।

पर्यटन सिर्फ हमारे जीवन में खुशियों के पल को वापस लाने में ही मदद नहीं करता है बल्कि यह किसी भी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज के समय में जहां हर देश की पहली जरूरत अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है वहीं आज पर्यटन के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था पर्यटन उद्योग के इर्द-गिर्द घूमती है। यूरोपीय देश, तटीय अफ्रीकी देश, पूर्वी एशियाई देश, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि ऐसे देश हैं जहां पर पर्यटन उद्योग से प्राप्त आय वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। 

भारत जैसे देशों के लिए पर्यटन का खास महत्व होता है। भारत जैसे देश की पुरातात्विक विरासत या संस्कृति केवल दार्शनिक स्थल के लिए नहीं होती है इसे राजस्व प्राप्ति का भी स्रोत माना जाता है और साथ ही पर्यटन क्षेत्रों से कई लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी होती है। आज भारत जैसे देशों को देखकर ही विश्व के लगभग सभी देशों में पुरानी और ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण दिया जाने लगा है। 

विश्व पर्यटन दिवस के विषय (थीम)
1980 का विषय "सांस्कृतिक विरासत और शांति और आपसी समझ के संरक्षण के लिए पर्यटन का योगदान" था।
1981 का विषय "पर्यटन और जीवन की गुणवत्ता" था।
1982 का विषय "यात्रा में गर्व: अच्छे मेहमान और अच्छे मेजबान” था।
1984 का विषय "अंतरराष्ट्रीय समझ, शांति और सहयोग के लिए पर्यटन" था।
1985 का विषय "युवा पर्यटन: शांति और दोस्ती के लिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत" था।
1986 का विषय "पर्यटन: विश्व शांति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति" था।
1987 का विषय "विकास के लिए पर्यटन" था।
1988 का विषय "पर्यटन: सभी के लिए शिक्षा" था।
1989 का विषय "पर्यटकों का मुक्त आवागमन एक दुनिया बनाता है" था।
1990 का विषय था "पर्यटन: एक अपरिचित उद्योग, एक मुक्त सेवा"।
1991 का विषय "संचार, सूचना और शिक्षा: पर्यटन विकास की शक्ति कारक” था।
1992 का विषय “पर्यटन: एक बढ़ती सामाजिक और आर्थिक एकजुटता का कारक है और लोगों के बीच मुलाकात का" था।
1993 का विषय "पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण: एक स्थायी सद्भाव की ओर" था।
1994 का विषय "गुणवत्ता वाले कर्मचारी, गुणवत्ता पर्यटन" था।
1995 का विषय "विश्व व्यापार संगठन: बीस साल से विश्व पर्यटन में सेवारत" था।
1996 का विषय "पर्यटन: सहिष्णुता और शांति का एक कारक" था।
1997 का विषय "पर्यटन: इक्कीसवीं सदी की रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अग्रणी गतिविधि " था।
1998 का विषय "सार्वजनिक-निजी क्षेत्र भागीदारी: पर्यटन विकास और संवर्धन की कुंजी” था।
1999 का विषय था "पर्यटन: विश्व धरोहर का नयी शताब्दी के लिये संरक्षण"।
2000 का विषय "प्रौद्योगिकी और प्रकृति: इक्कीसवीं सदी के प्रारंभ में पर्यटन के लिए दो चुनौतियॉं" था।
2001 का विषय "पर्यटन: सभ्यताओं के बीच शांति और संवाद के लिए एक उपकरण " था।
2002 का विषय "पर्यावरण पर्यटन सतत विकास के लिए कुंजी" था।
2003 का विषय "पर्यटन: गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और सामाजिक सद्भाव के लिए एक प्रेरणा शक्ति" था।
2004 का विषय "खेल और पर्यटन: आपसी समझ वालो के लिये दो जीवित बल, संस्कृति और समाज का विकास" था।
2005 का विषय "यात्रा और परिवहन: जूल्स वर्ने की काल्पनिकता से 21 वीं सदी की वास्तविकता तक" था।
2006 का विषय "पर्यटन को समृद्ध बनाना"।
2007 का विषय "पर्यटन महिलाओं के लिए दरवाजे खोलता है" था।
2008 का विषय "जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती का जवाब पर्यटन" था।
2009 का विषय "पर्यटन - विविधता का उत्सव" था।
2010 का विषय "पर्यटन और जैव विविधता” था।
2011 की विषय "पर्यटन संस्कृति को जोड़ता है" था।
2012 का विषय "पर्यटन और ऊर्जावान स्थिरता 'था।
2013 का विषय "पर्यटन और जल: हमारे साझे भविष्य की रक्षा" था।
2014 का विषय "पर्यटन और सामुदायिक विकास” था।
2015 का विषय "लाखों पर्यटक, लाखों अवसर" था।
2016 का विषय "सभी के लिए पर्यटन - विश्वव्यापी पहुंच को बढ़ावा देना" होगा।

 

बांसवाड़ा में पर्यटन विकास के लिए असीम संभावनाएं हैं, यहां पर धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के अलावा एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई स्थान भी है और यह सभी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। 

बाँसवाड़ा को 100 टापुओं का शहर भी कहते है और इन टापुओं को विकसित करने का निर्णय लिया गया है। यहां पर इसके लिए काम भी शुरू हो चुका है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करीब दस सालों से लगातार प्रयासरत मुजफ्फर अली ने बताया कि उस समय भी बांसवाड़ा का पर्यटन ऐसा ही था लेकिन इसकी जानकारी लोगों तक नहीं पहुंची थी। इसी बीच ख्याल आया है कि क्यों न हमारे बांसवाड़ा की सुंदरता को दूसरे जिलों के लोगों को भी दिखाया जाए। इसके बाद जो भी पर्यटक शहर में घूमने के लिए आते है तो उन्हें स्वयं के खर्च से अपने वाहन में बिठाकर सभी जगहों का भ्रमण करवाता हूं। ताकि वह लोग सुंदर और इन दुर्गम नजारों को देखकर पूरे देश में इसकी जानकारी व प्रचार-प्रसार का काम करें। 

वहीं दूसरी ओर प्रशासन के कहने पर एक टीम भी बन चुकी है जिसमें बांसवाड़ा राजपरिवार के जगमालसिंह, सूचना एवं जनसंपर्क उपनिदेशक कमलेश शर्मा भी शामिल है। लगातार प्रयास के बाद टापुओं के विकास के लिए सरकार ने भी दस करोड़ रुपए दिए है। इसके लिए टापुओं का चयन कर उनका सौंदर्य बढ़ाने के लिए काम भी शुरू हो गया है। 



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