पर्यावरण का स्तंभ बनी युवाओं की कोशिश

Updated on June 6, 2018 Social
पर्यावरण का स्तंभ बनी युवाओं की कोशिश , Banswara "Paryavran ka stambh bani yuvaon ki koshish"

Banswara June 06, 2018 - पर्यावरण के प्रती प्रेम व समर्पण का भाव मनुष्य अपनी जन्म के साथ कुदरत से विरासत में पाता है| हम जैसे-जैसे समय के साथ बड़े होते है अपनी जिम्मेदारी व आस-आस के लोगो के रवैये व उनके बर्ताव से हममे भी प्रकृति से विरासत में पाए पर्यावरण का प्रेम व भाव कम होता जाता है| आज 21 वि सदीं में जन्हा हमारा देश युवा शक्ति में सबसे आगे है| जिसके परिणाम स्वरूप उसके जोश व उर्जा की वजह से जिस क्षेत्र में युवाओं ने अपनी उर्जा व समय दिया उस क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की क्रांति आई है| चाहे वह क्षेत्र पर्यावरण व ग्लोबल वार्मिंग का क्यों न हो| 

क्या सालभर में एक ही दिन होता है “विश्व पर्यावरण दिवस” पर्यावरण के प्रती प्रेम दिखाने का ? ......
आज शहर बांसवाडा के वर्तमान गर्भ में झांक कर देखे तो शहर की कई संस्थाए समाजसेवीं व युवा अनवरत इस पर्यावरण को अपने तरीके से बचाने व नये सिरे से सहेजने का काम कर रही है| जिसमे वृक्षम टीम, हरिओम ग्रूप व आनंदपुरी मडकोला मोगजी का गरासिया फार्म हाउस एंड फाउंडेशन अग्रसर है| 

इस क्षेत्र मे हरिओम ग्रुप के मांगीलाल तेजंग ने बताया की पिछले सालो से अभी 2018 तक करीब 300 पौधे लगाकर उसे सहेजने का काम किया है| जो अपने स्तर पर पोधों को टेंकर के जरिये पानी पिलाता है या टेंकर की सुविधा न होने पर इस ग्रुप की माता बहने व सदस्य बाल्टी में पानी भर इन पौधों को पानी पिलाने का काम करती है| इसी कड़ी में के पर्यावरण की हार्ट बिट को थामा है वृक्षम टीम ने जो हर रविवार पौधरोपण करती है जीसकी अपनी झलक सबसे अलग है | इस टीम ने नये सदस्यों की सक्रियता बढाने के लिए नये तरीके अपनाए है | टीम के सदस्यं नीरज पाठक ने बताया की किसी के जन्मदिवस पर किसी की शादी की सालगिरह या पूण्यतिथि पर उस मृत आत्मा के नाम से वृक्षारोपण का काम किया जाता है जिससे रोपे गये पोधें में उसे अपने मृत आत्मा को पोधें के रूप देख उसकी सार सम्भाल कर सकें| जिसके साथ समय-समय पर वृक्षम टीम द्वारा पर्यावरण सकारात्मक प्रतियोंगिताये भी आयोजित की जाती है| जिसकी कड़ी में वृक्षम टीम ने नये प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेते हुवे प्लास्टिक को बायकाट करने की नई योजना तैयार की है|
हमने आये दिन नई संस्थाओ व NGO को काम करते देखा जो यातो पेपर वर्क में काम दीखता है या वो किसी प्रेशर से खानापूर्ति कर उसकी फर्मुलिटी की जाती है | एक ऐसा फाउंडेशन जो शहर से करीब 80 किलोमीटर दूर आनंदपूरी के गांव मडकोला मोगजी का गरासिया फार्म हाउस एंड फाउंडेशन है जिसने सन 2001 से 85 बीघा जमीन में से कुछ हिस्से को उपयुक्त जांच कर पौधों के अनुकूल चयन कर 11 रेलिंग पौधों से शुरुआत की जो यह क्रम समय के साथ बढ़ता गया हर साल अच्छे बीजों व पोधों के साथ बरसात की सीजन में यंहा पौधांरोपण किया जाता है | 

इस फार्म हाउस की छोटे पहाड़ीनुमा टीले पर 1 लाख रु. की कीमत के केला, अनार, नीम, नींबू व अलग-लग किस्मों के सेकड़ो पोधें लगाये गये हैं| इस फाउंडेशन के संवरक्षक अतीत गरासिया ने बताया की इस पौधारोपण से कई पक्षियों व जीवों को अपना आसरा मिला है यंहा की हरियाली की वजह से उन्हें दाना व पानी भी मिलता हैं | जब उनके चहकने से मीठी आवाज कानो पर पड़ती है तो लगता हैं वह संतुष्ट होकर प्रकृति का आभार जता रहे हो| अतीत गरासिया ने बताय की पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता से मिली हैं जिसको वह अपने साथियों के साथ सांझा कर पर्यावरण के प्रति उन्हें जागरूक करने का काम कर रहें है|
नमन है उन सभी सामजिक संस्थाओ, NGO व सामाजिक कार्यकर्ताओं का जो सकारात्मक रूप से पर्यावरण के लिए अपने माध्यमों से बदलाव लाने का काम कर राष्ट्रहित में सहयोग कर रहे हैं |

-www.Hellobanswara.com



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