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सिहंस्थ गुरु में नहीं होते है विवाह

सिहंस्थ गुरु में नहीं होते है विवाह

सिहंस्थ गुरु में नहीं होते है विवाह (No marriage in Simhastha Guru)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह में कोई भी विचारधारा हो सभी में लगभग प्रत्येक शुभ कार्यों में देवताओं की उपस्थिति होना अनिवार्य है, जैसे वास्तु पूजा,  वैवाहिक कार्य, हवन आदि सभी में उस कार्य से संबंधित देवता का आह्वान कर अघ्र्यादि अर्पित किया जाता है। अतः विवाह जैसे विशिष्ट कार्यों में ‘दश महादानों’ में से एक है कन्या दान भी सम्मिलित है और इसमें देवताओं की अनुपस्थिति में ये दान स्वीकार्य नहीं हो सकता है। इसी कारण ‘सिंहस्थ गुरु’ में शुभ कार्य करना वर्जित है।


सूर्य आत्मकारक ग्रह है। गुरु हृदयकारक एवं जीवन को प्रशस्त करने वाला ग्रह है। चंद्रमा मन कारक ग्रह भी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह विषयों में वर के लिए सूर्य बल और चंद्र बल देखा जाता है और वधू के लिए गुरु बल एवं चंद्र बल देखा जाता है। विवाह में शुभ एवं मांगलिक कार्यों में वर-वधू के गृहस्थ जीवन को प्रशस्त बनाने के लिए तीनों ग्रहों के शुभ होना महत्वता है। इसलिए सामान्य रूप से गुरु का सत्व गुण राशि धनु और मीन के सूर्य में तथा सूर्य की रजोगुण राशि सिंह में गुरु का गोचर गुरुर्वादित्य दोष कहा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब गुरु सिहंस्थ में आता है तो सभी शुभ कार्य वर्जित होते है. शास्त्र के अनुसार सभी शुभत्वा करक ग्रह गुरु है गुरु समस्त देवता गणों में पूज्य हैं। गुरु बुद्धि, ज्ञान, सत्यता, सद्गुण, दया, श्रद्धा, समृद्धि, सम्मान एवं न्याय का कारक ग्रह है। वैवाहिक विषयों में पुत्र प्राप्ति, भवन-भूमि प्राप्ति, धन प्राप्ति आदि के लिए गुरु अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है, जिनकी अनुपस्थिति में गुरु के आशीर्वाद की प्राप्ति नहीं होती है. इस सौर मंडल का सम्राट सूर्य ग्रह है. जब गुरु सूर्य राशी में आता है तो गुरु सूर्य के ही प्रभाव में रहता है और संसार के सभी प्राणियों को अपना शुभ आशीर्वाद देने में असमर्थ रहता है। 


स्त्री की कुंडली में गुरु पति की भूमिका भी निभाता है। इसलिए विवाह के शुभ मांगलिक कार्यों में गुरु का होना अनिवार्य माना जाता है।


पौराणिक कथा के अनुसार देव और दानव द्वारा समुन्द्र मंथन के दौरान चौदह रत्न निकले जिसमे अमृत कलश भी था. जिसके देव असुरों में युद्ध हुवा जिस मध्य इंद्रपुत्र जयंत लेकर भाग गया. वैसे कहीं पर गरुड़ जी का भी नाम है. दैत्यों ने उस देवता का पीछा किया। 12 वर्षों तक निरंतर पीछा किया जाता रहा। इस अवधि में उस देवता ने हरिद्वार, प्रयाग, नासिक तथा उज्जैन आदि 4 स्थानों पर विश्राम भी किया। इन स्थलों पर अमृत की कुछ बूंदें छलक गई और वहां पर आज भी कुंभ मेले का आयोजन होने लगा।  


इस घटना के दौरान गुरु एवं सूर्य दोनों ही सिंह राशि में उपस्थित थे और तब ही से सिंहस्थ गुरु के समय में गंगा एवं गोदावरी के मध्य के क्षेत्र में शुभ कार्य वर्जित हो गए। 
अगर सिंह गुरु में,  मघा नक्षत्र में, गुरु का प्रवेश होने पर विवाहादि कार्य हों, तो वह वर-कन्या दोनों के लिए घातक हैं।


पिछले वर्ष 14 जुलाई, 2015 में स्टेट समय 06 बजकर 05 मिनट पर गुरु ने सिंह राशी में प्रवेश किया. जिससे शुभ कार्य वर्जित हो गए. पर जो जातक लगभग 1 वर्ष तक प्रतीक्षा नहीं कर सकते हैं, उनके लिए शास्त्रों में परिहार भी दिया है, की यदि सिंह के गुरु में यदि मेष का सूर्य हो तो गुरु दोष नहीं रहता और इस समय के दौरान वो विवाह कर सकता है। इस बार 14 अप्रैल, 2016 से 13 मई, 2016 तक सूर्य मेष में रहेगा। अतः यह समय मांगलिक कार्यों के लिए शुभ है। 11 अगस्त, 2016 को गुरु कन्या राशी में प्रवेश करेगा परन्तु देव सोये होने से मांगलिक कार्य नहीं हो सकते है. 10 नवम्बर, 2016 देव उठनी ग्यारस से मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे.


गुरु सिंह राशी में प्रवेश करने के बाद प्रथम पांच चरण में चातुर्मास आता है और इस समय के दौरान लग्न मुहूर्त नहीं आते है. सिंह के प्रथम चरण के बाद सिंह का गुरु मांगलिक कार्य गंगा के उत्तर भाग, गोदावरी, दक्षिण में शुभ कार्य हो सकते है. गंगा एवं गोदावरी नदी के बीच के प्रदेश में सिंह के गुरु में मांगलिक कार्य नहीं होते है. गंगा नदी उत्तराँचल से बांग्लादेश होती हुई बंगाल की खाड़ी में मिलती है, गोदावरी नासिक, आँध्रप्रदेश के नस्सपुर के बाद बंगाल की खाड़ी में मिलती है. वैसे गंगा गोदावरी के बीच के भाग, गोदावरी के बीच, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओड़िसा, उत्तरप्रदेश, गोदावरी के उत्तर भाग में आता है इसलिए सिहंस्थ कुम्भ में इन स्थानों पर मांगलिक कार्य वर्जित है. सिहस्थ के समय पंजाब, हरियाणा, हिमांचल, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, आन्ध्र के दक्षिण भाग, मुंबई, पूना, कोल्हापुर, सोलापुर, हैदराबाद, कर्णाटक, तमिलनाडु में मांगलिक कार्य हो सकते है.

Dr. Bhawani Khandelwal (ज्योतिषाचार्य, वास्तु विशेषज्ञ)

Mob. 9414101332

 

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