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दूध योजना या राजनीतिक व्यापार का पैंतरा !

दूध योजना या राजनीतिक व्यापार का पैंतरा !

Banswara July 05, 2018 राजस्थान में हाल ही में शुरू की गई दूध योजना को राजनीतिक व्यापार की दृष्टि से देखा जाए तो एक बार सबको संशय होगा कि यह कैसे हो सकता है। लेकिन यह काफी हद तक सच भी है। सबसे पहले तो सवाल है कि राजनीतिक व्यापार क्या है। यह जानना सबसे महत्वपूर्ण और जरूरी है। यह राजनेता और व्यापारी के दिमाग से पैदा हुई योजना है । जिसे आम भाषा में राजनीतिक व्यापार कहा जाता है। राजनीतिक सोच और हथकंड़ों से बना यह व्यापार आजकल फलफूल भी रहा है। ऐसी योजनाओं में कुछ कमियां छोड़ दी जाती है, जिसे व्यापारी पूरा करते हैं। जैसे दूध देना, लेकिन शक्कर का नामोनिशान नहीं। इतनी मात्रा में दूध कहां से आना इसकी कोई प्लानिंग नहीं। अब जब योजना शुरू हो ही गई है तो यह भी सोचा जाएगा कि ऐसा कौनसा दूध मिले जो खराब भी न हो और बिना शक्कर के बच्चे पी भी सकें। ये है व्यापारी सोच।


अब सभी के मन में सवाल यह है कि यह योजना राजनीतिक व्यापार कैसे हो सकती है। तो हमें यह जानने के लिए कुछ माह थोड़ा सा पीछे जाना होगा। वसुंधरा जी और पतंजली का लंबा चौड़ा व्यापार खड़ा करने वाले बाबा रामदेव की सभाओं में। कुछ माह पूर्व ही बाबा रामदेव ने प्रदेश के कई शहरों सभाएं की, योग कराया और दबे शब्दों में कुछ फंड भी एकत्रित किया, जिसका कोई सबूत नहीं है। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि जहां जहां उन्होंने सभाएं की वहां वहां माननीया वसुंधरा जी ने भी अपनी यात्रा कर डाली। यहां तक उनके ही मंच को साझा करते हुए उन्होंने योग भी किया। सामान्य तौर पर देखा जाए तो यह महज एक संयोग था। लेकिन राजनीतिक की दृष्टि से देखा जाए तो ये संयोग नहीं प्लानिंग थी आगामी चुनाव की। अब इसे सीधा सीधा कहे तो यह बाबा जी ने उनके चुनाव का सर्वे किया और समर्थन भी, या यूं कहे कि फंड भी एकत्रित करके दिया! हालांकि इस बात का कहीं सबूत नहीं है। तो इसकी एवज में वसुंधरा जी ने दूध योजना लागू कर दी। अब दूध योजना से बाबाजी का फायदा कैसे? वो ऐसे कि हर रोज 100 में से एक घर में दूध तो फटता ही है। ठीक इसी तरह से बांसवाड़ा जिले की बात की जाए तो यहां 8000 स्कूल हैं। इस हिसाब से करीब 800 स्कूल में हर रोज दूध फटेगा। बच्चे बीमार होंगे। दूध में शक्कर न देकर राजनीतिक व्यापार को बढ़ावा भी दिया गया। वो ऐसे कि प्रदेश में सभी जगहों पर इतनी मात्रा में दूध मिलना मुश्किल है। अब ऐसे में इसका फायदा बाबा जी को हो सकता है! वो कैसे? वो ऐसे कि बाबाजी ने भी प्रदेश के दौरे से पूर्व दूध का एटीएम शुरु किया था। यानी की दूध का पाउडर, जो फ्लेवर में भी मौजूद है। ताकि दूध में शक्कर ना भी हो तो पानी में उसे घोलकर बच्चों को दिया जा सकता है। इससे दूध की खपत की समस्या खत्म और शक्कर की जरूरत भी नहीं। यहां से शुरु हुआ व्यापार खेल। अब ज्यादा से ज्यादा स्कूलों में दूध की जगह पर दूध के पाउडर का उपयोग होगा। इससे गर्म करने की झंझट खत्म, गैस के पैसे की बचत और न तो दूध फटेगा, न ही बच्चे बीमार पड़ेंगे। 
है न मजे की बात। यदि इस हिसाब से देखा जाए तो यह पूरी की पूरी योजना ही राजनीतिक व्यापार है। 

नोट : यह पूरा लेख और इसमें लिखी गई पूरी बात लेखक की मन की भावनाएं हैं,  इस लेख का उद्देश्य किसी को आहत करना नहीं है। 

लेखक : काको वागड़ी..

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