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पर्यावरण के साथ मनाये गणेश महोत्सव

article - 9 Aug 2018 09:37 pm

August 09, 2018 गणेश उत्सव जो कि बहुत धुम धाम से हमारे देश में मनाया जाता है बस अब आने ही वाला है। 
यह भगवान गणेश के जन्म के उत्सव के तौर पर दस दिनों तक मनाया जाता है। इस उत्सव में गणेशजी की मूर्ति की स्थापना की जाती है, सजावटी पाण्डालों, फुल व अन्य वस्तुओं के साथ और अन्त में (दसवें दिन) इनका विसर्जन कर दिया जाता है जो कि प्रतीक है की गणेश जी अब वापस कैलाश पर्वत पर लौट जायेंगे। 

यह त्यौहार लोगो के बीच में काफी लोकप्रिय है और इसमें बहुत से राज्य भागीदार होते है पर अब जिम्मेदारी का एहसास लोगो में घर कर रहा है और यह परिवर्तन साल दर साल देखा जा रहा है। 

इस त्यौहार के सारे पहलूओं (मूर्ति लाना, सजावट एवम् विसर्जन) को लोगों ने अपने हिसाब से मरोड़ लिया है। इसी कारण से यह त्यौहार पानी के प्रदूषण का एक स्त्रोत बन गया है, रसायन, पेंट, प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्ति जो कि पानी में अघुलनशील है समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचा रही है।


यह रिपोर्ट लगातार आ रही है कि धातु अयस्क सामग्री के स्तर के बढ़ने के अतिरिक्त जल निकायों की अम्लीयता व जहरीलापन बढ़ता जा रहा है। यह दीर्घावधि में मानव जीवन के अतिरिक्त अन्य जीवन के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है और अचल परिवर्तन ला सकता है। इन सब बातों को देखते हुए समय की यह मांग है कि उत्सव तो मनाया जाये पर वह पर्यावरण के अनुकूल कैसे हो इस चीज को मध्यनजर रखना है। इसके बहुत से तरीके है जैेसे की गारे (मिट्टी) की मूर्ति बनाई जाऐ और पर्यावरण अनुकुल सजावटी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाए इत्यादि। बहुत से कृत्रिम तालाब बनाये गये है विसर्जन के लिए जिससे की काम भी हो जाए व समुद्री वनस्पति और जीव को नुकसान भी नहीं पहुंचे। यहाँ नीचे व्यापक तरीके दिये हुए है जिससे की पर्यावरण के अनुकूल गणेश चतुर्थी बना सकते है। 

मूर्तियाँ -   
-     प्राकृतिक व बायोडिग्रेडेबल सामग्री जैसे मिट्टी, नारियल भूसी का इस्तेमाल 
-     जैविक रंगो जैसे कि हल्दी, मुलतानी मिट्टी, व गेरू का इस्तेमाल 
-     मूर्तियों के आकार को कम रखना जिससे की पानी के प्रदूषण को नियंत्रण में रखा जा सके (प्लास्टर आॅफ पेरिस व रंग )  
-    खुद मूर्तियाँ बनाये 
 
सजावट -   
-     खुद ऐसी वस्तुएँ बनाएँ और काम में ले जैसे की प्राकृतिक फूल, तेल का दीपक, कागज के उत्पाद इत्यादि जो कि वापिस उपयोग में या कम्पोस्ट किये जा सकते है     
-    बिजली का सदुपयोग एवं एल.ई.डी. बल्बो का प्रयोग 
-     रंगोली के लिए बायोडिग्रेडेबल रंग जैसे हल्दी, हिना, चावल पाउडर, हर्बल गुलाल इत्यादि का इस्तेमाल 
-     संगीत को कम ध्वनि में चलाना एवं ध्वनि - विस्तारक यंत्र को नहीं काम में लेना 

रसम रिवाज -   
-     प्लास्टिक की सजावट, बैग व पात्रों का कम इस्तेमाल करें, इसके बदले कपड़े या कागज के बैगों को काम में ले 
-     प्रसाद वगैरह का बायोडिग्रेडेबल (पत्ते/कागज) वस्तुओं में वितरण 

विसर्जन -   
-     कृत्रिम पानी के तालाबों/टैंको में विसर्जन 
-     फूलों, मालाओं, कपड़ों, प्लास्टिक एवम् दूसरी सजावटी वस्तुओं को सुखे व गीले कचरे के रूप में अलग करें 
-     बायोडिग्रेडेबल कचरे को कम्पोस्ट में डाले ताकि खाद बन सके खेती के लिए 
-     सारे कचरे को जिम्मेदारी पूर्वक निर्वहन करने का कश्ट करें 

इन उपरोक्त लिखित तरीकों से पर्यावरण के अनुकूल गणेश महोत्सव मना सकते है। हम खुद इतने आलसी हो जाते है की मेहनत से दूर भागते है और इस प्रकार की मूर्ति बनाने से बचते है, पर हमारे पास समय होता है थोडा अपने धर्म के और मेहनत करेंगे तो हमारे हर त्यौहार को सहीं रूप से मना सकते है और एक समाज में एक मिसाल कायम कर सकते है।

 

Dhawal Malot

Malot Study Point,
62,Mohan Colony,Gali No.5,
Banswara-327 001,Rajasthan.
Ph:(02962)246634;+919460263745

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